
Plantation at wasteland
बेमेतरा/नवागढ़. बेमेतरा जिले में मनरेगा मद से व वन विभाग द्वारा जिला गठन के बाद जिस अनुपात में पौधरोपण किया गया, यदि 10 प्रतिशत भी पौधे जीवित होते तो जिला हरियर छत्तीसगढ़ में अग्रणी होता। मनरेगा में पौधरोपण का मतलब है पौधा मरेगा। पोल, पाइप, पप, कंटीले तार, खाद कमीशन देंगे। काम कराने वाले हरे रहेंगे। लेकिन जिले में एक जगह इसका अपवाद भी है।
ढोलिया के ग्रामीणों ने जगाई उम्मीद
नवागढ़-बेमेतरा मार्ग में ग्राम झाल व ढोलिया के बीच जिस पथरीली जगह पर पशुओं को भरपेट चारा नहीं मिलता था, उस जगह पर ग्राम पंचायत ढोलिया ने पौधरोपण कर हरियर बेमेतरा की उम्मीद जगा दी है। मजदूरों के पसीने से हरे फलदार पौधे फल देने लायक तो नहीं हुए पर पहली साल में कल का बेहतर संदेश दे रहे हैं। इस मार्ग से गुजरने वाले लोग जरुर इसे निहारते हैं। यहां के पौधे बड़े कैसे हुए इसे हर ग्राम पंचायत के रोजगार सहायकों को दिखाना चाहिए।
वहीं दूसरी जगह बचे केवल पोल और तार
मनरेगा मद से लगे पौधे भ्रष्टाचार की पानी पसंद नहीं करते। ढोलिया से दो ग्राम पंचायत आगे ग्राम पंचायत धनगांव में रामपुर मार्ग में पौधरोपण के नाम पर लाखों रुपए व्यय किया गया। पौधा लगाने पुराने पेड़ काटे गए। अब स्थिति यह है कि केवल खरपतवार ही नजर आ रहे हैं। चौकीदार के लिए बनी झोपड़ी नदारद है। ग्राम धनगांव में मनरेगा मद के कार्यों के नाम पर लीपापोती किया जाता है। सूखे पौधे तबाह हो गए हैं। पौधरोपण स्थल पर केवल बिजली पोल, तार बचे हैं। मौका निरीक्षण से यही लगता है कि वर्षों से यहां कोई आया ही नहीं।
विभाग की मनमानी बता रही बोर्ड
पौधरोपण में वन विभाग की मनमानी सूचना बोर्ड बयां करते हैं। जिसमें सबकुछ लिखा जाता है पर स्वीकृति राशि नहीं। क्योंकि बात निकली तो दूर तलक जाएगी। वन विभाग द्वारा अंधियारखोर, जेवरा, मक्खनपुर तक पौधरोपण किया गया है। विभागीय सूचना बोर्ड की मानें तो 2 किमी रकबे में मिश्रित प्रजाति के 2 हजार पौधे रोपे गए। वर्ष 2017-18 में रोपे गए पौधे 2018 के पहले तिमाही में ही दम तोड़ दिए। अब पौधों के नाम पर केवल सूचना बोर्ड ही जीवित है, जो कार्यों का लेखा-जोखा बताने के लिए पर्याप्त है।
Published on:
28 Apr 2018 09:41 am
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