इस जिले के 154 गांव भीषण सूखे की चपेट में, हैंडपंप ने दिया जवाब, पानी की बूंद-बूंद को तरसे लोग

इस जिले के 154 गांव भीषण सूखे की चपेट में, हैंडपंप ने दिया जवाब, पानी की बूंद-बूंद को तरसे लोग

Dakshi Sahu | Publish: Apr, 14 2018 06:00:00 AM (IST) Bhilai, Chhattisgarh, India

जिले के 154 गांव जल संकट से गुजर रहे हैं। इन गांवों में खराब हैंडपंपों को सुधारने के लिए विभाग ने इस बार कोई अभियान नहीं चलाया।

बेेमेतरा. जिले में बीते 3 वर्ष से हो रही अल्पवर्षा का असर जल संकट के रूप में अब सामने नजर आने लगा है। लेकिन पीएचई के जिम्मेदार अधिकारी इस संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने की बजाए अब जाकर प्रभावित गांवों को नल जल योजना में शामिल करने का प्रस्ताव भेज रहे हैं। ऐसे में प्रभावित गांव के लोगों को गर्मी के दिनों में योजना का लाभ मिल पाएगा, इसको लेकर संशय बना हुआ है।

1718 हैंडपंप हुए खराब

बताना होगा कि जिले के 154 गांवों में जलस्तर गिरने के कारण 1718 हैंडपंप बेकार साबित हो रहे हैं, इसके अलावा 270 पावर पंप भी प्रभावित हुए हैं। जिले में जनवरी के पश्चात तेजी से जलस्तर में गिरावट आई है। जनवरी में जिले के 1340 हैंडपंप जलस्तर गिरने से बेकार साबित हुए थे, इसके बाद विभागीय लापरवाही की वजह से स्थिति में सुधार होने की बजाए और बिगडऩे लगी है।

आज की स्थिति में जिले के प्रभावित गांवों में बंद हैंडपंपों की संख्या बढक़र 1718 तक पहुंच चुकी है। वहीं जनवरी के दौरान जहां गांवों में लगे 220 पावर पंप बंद हो चुके थे, वहीं यह आंकड़ा अब बढक़र 270 तक जा पहुंचा है।

नवागढ़ के गांव ज्यादा प्रभावित

जिले में सबसे अधिक पेयजल संकट बेमेतरा विकासखंड में नजर आ रहा है। विकासखंड में पूर्व में जलस्तर में गिरावट की वजह से 404 हैंडपंप और 16 पावर पंप खराब हुए थे, आज की तारीख में 549 हैंडपंप और 33 पावर पंप खराब हो चुके हैं। साफ है कि बेमेतरा विकासखंड में तेजी से जलसंकट अपने पैर पसार रहा है। इसी वहीं साजा विकासखंड में पूर्व में 317 हैंडपंप खराब थे, जिनकी संख्या अब बढक़र 393 तक पहुंच गई है।

जलस्तर गिरने के कारण सबसे ज्यादा बेरला विकासखंड में हैंडपंप खराब हुए हैं। बेरला में तीन माह पूर्व बंद हैंडपंपों की संख्या 128 थी, जो आज की स्थिति में बढक़र 265 हो चुकी है। नवागढ़ विकासखंड में स्थिति में थोड़ा सुधार देखने को मिला है, जहां जनवरी में 519 हैंडपंप बेकार थे, जो अब घटकर 515 पर पहुंच गया है। केवल 4 पंपों की मरम्मत की गई है।

154 गांवों में जलसंकट की स्थिति

जिले में 154 गांवों में पेयजल संकट की स्थिति है। बेमेतरा विकासखंड में 35 गांव प्रभावित हैं, जिसमें बेरा, बेतर, उमरिया, कापा, तेदुभांठा, सिरंवाबाधा, बिलाई, मुड़पार, करचुवा, ढारा, नवागांव, भोइनाभाठा, कंतेली, बहेरा, लोलेसरा, बैजी, गागपुर, बहुनवागांव, खंडसरा, रायखेड़ा, जगमड़वा, मोहतरा, लावातरा, चमारी, झाझाडीह, ढेालिया, धनगांव, करचुवा, मरका, मुलमुला, खपरी, खाम्ही, पेंड्रीतराई व कोसा में स्थिति खराब है। नवागढ़ विकासखंड के ग्राम रनबोड धोधरा, मानिकपुरी, गाड़ामोर, खपरी, धरमपुरा, भैसामुड़ा, बैजलपुर, लालपुर सहित 80 गांवों में पेयजल संकट की स्थिति है। साजा विकासखंड के बनियाडीह, खैरा, कन्हेरा, ओडिया, अगरी, अकोला, चिखली, बनराका टिपनी, दर्री, गातापार, बोरिया, पदमी, किरकी सहित 37 गांवों में पेयजल संकट है, वहीं बेरला विकासखंड के सिगंदेही व कठिया में पेयजल संकट की स्थिति हैंडपंपों के खराब होने के कारण बनी है।

फिर भी नहीं जागा विभाग

जनवरी महीने से ही जिले में सैकड़ों हैंडपंप खराब होने के बाद भी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की ओर से न तो कोई अभियान चलाया गया और न ही हैंडपंपों के सुधार के लिए किसी प्रकार की कार्ययोजना बनाकर तैयारी की गई। पूर्व के वर्षों में विभाग की ओर से गर्मी शुरू होने के पहले अभियान चलाकर हैंडपंपों व पावर पंपों का सुधार किया जाता रहा है, लेकिन इस बार इस तरह की कोई विभागीय कवायद देखने को नहीं मिल रही है।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned