
बैतूल. जौलखेड़ा सहित आसपास के क्षेत्र में लगातार बाघ के पगमार्क नजर आने से ग्रामीण दहशत में है। वहीं किसान रात में फसलों की सिंचाई करने नहीं जा रहे। गांवों में मुनादी की जा रही है कि रात में बाहर ना निकले, लेकिन बिजली कंपनी रात में ही सप्लाई दे रही है। इससे किसान खेत नहीं गए तो फसल सूख सकती है। गेहूं की फसल के लिए किसान रात में सिंचाई करने पहुंच रहे हैं, लेकिन विगत एक सप्ताह से बाघ की दहशत से वे घर बैठने को मजबूर हैं।
वन विभाग द्वारा भी किसानों को समझाइश दी जा रही है कि रात में बाहर निकलकर जान जोखिम में नहीं डालें। जौलखेड़ा के किसान भूपेन्द्र बोरखड़े ने बताया कि रात में दो चरणों में बिजली आती है इसमें सिंचाई करना जरूरी होता है, लेकिन जब से गांव और आसपास बाघ की दहशत फैली है वे खेत नहीं जा रहे हैं इससे फसलें प्रभावित हो रही है। किसान कौशलसिंह ठाकुर, नथनसिंह राठौर, गगन सिंह राठौर ने बताया कि निरगुड़ रोड पर उनके खेत हैं जहां एनस फीडर से शाम 4.30 बजे से 10.30 बजे तक और अलसुबह 4.30 बजे से सुबह 8.30 बजे तक बिजली मिलती है। ऐसे में जहां शाम के समय खेत में जाना खतरे से खाली नहीं है वहीं अलसुबह भी भय रहता है।
किसान राजेश चिकाने ने बताया कि वर्तमान में गेहूं, चना और मटर के लिए पानी आवश्यक है यदि ऐसे समय पानी नहीं दिया तो आगे तक फसल पर प्रभाव पड़ता है, लेकिन बाघ की दहशत के कारण फसलों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। किसानों ने विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों से एनस फीडर का समय बदलकर दिन में बिजली देने की मांग की हंै ताकि उनकी फसलें प्रभावित ना हो सके।
रास्ता भटकने से बनी हुई है बाघ की मौजूदगी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में बाघों का मेटिंग सीजन रहता है इससे बाघ कई बार मादा के कारण राह भी भटक कर नए क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। इसके बाद वे अपनी ही गंध के माध्यम से वापस चले जाते हैं। संभवत: जौलखेड़ा क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में बाघ की मौजूदगी रास्ता भटकने के कारण ही हुई है। बाघ ने अभी तक सिर्फ दो भैंसों पर हमला किया है, जिसमें से एक की मौत हो गई है।
जंबाड़ी में नदी के किनारे नजर आए पगमार्क
जौलखेड़ा क्षेत्र में घूम रहे बाघ के पगमार्क शनिवार को आमला ब्लॉक के जंबाड़ी गांव के पास नदी के पास नजर आए हैं। वन परिक्षेत्र अधिकारी अशोक रहंगडाले ने बताया कि जंबाड़ी से आगे की ओर जाते हुए पगमार्क नजर आए हैं। संभवत: अब बाघ जौलखेड़ा क्षेत्र से जा सकता है, क्योंकि इसी रास्ते से बाघ के पुराने पगमार्क भी मिले हैं इससे साफ है कि इसी मार्ग से बाघ की दस्तक भी हुई थी। उन्होंने बताया कि फिलहाल ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है। वहीं किसानो ंको भी सचेत किया जा रहा है कि वे रात में बाहर न निकले। बच्चों को भी घरों में ही रखें।
Published on:
05 Dec 2021 04:16 pm
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