
नया संसद भवन और कालीन
New Parliament: कहते हैं कि भगवान हर इंसान को किसी न किसी हुनर से नवाजता है। ऐसे ही भदोही के लोगों को भगवान से कालीन बनाने का हुनर मिला है। भदोही के बुनकरों ने अपना परचम अमेरिका से यूरोप तक लहराया है और अब नए संसद भवन की शोभा बढ़ाएगा 'कालीन भैया' के शहर का कालीन। भदोही के बुनकर हस्त निर्मित कालीन को उद्योग नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत मानते हैं।
क्या है हस्त निर्मित कार्पेट ?
नए संसद भवन के निर्माण में कारीगरों के अलावा भदोही के बुनकरों ने भी अहम योगदान दिया है। हैंड नाटेड यानी हस्त निर्मित परम्परागत कालीन है। कच्चे माल से लेकर इसकी बुनाई तक की कारीगरी बुनकरों के हाथों से होती है। केवल हाथ से बने होने के कारण यह सामान्य कालीनों के मुकाबले महंगे होते हैं। इसकी गुणवत्ता बेहतर होती है। इसे दूर से देखकर ही पहचाना जा सकता है। देश भर के कालीन उत्पादन का लगभग चालीस प्रतिशत कालीन अकेले भदोही जिले में ही होता है।
कालीनों की आयु 100 साल है
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कालीन के एक इंच में 120 गांठें लगी हुई हैं। साथ ही यह कालीन उच्च गुणवत्तायुक्त है। इसकी आयु 100 साल से कम नहीं है। कालीनों में भदोही की बनी उच्च क्वालिटी के हैंड नॉटेड कार्पेट के साथ ही साथ कश्मीर के पारंपरिक हस्तनिर्मित कालीनों को उसमें शामिल किया गया है। जिसमें काश्मीरी "कानी' शाल की डिजाइनों को कालीन पर उकेरा गया है। उन्होंने जानकारी दी कि जैसी कालीन सेंट्रल विस्टा में लगाई जा रही है। उसकी सबसे अधिक मांग अमेरिका में होती है।
अक्टूबर में मिला था आर्डर
कालीन निर्माता कंपनी (obeetee) ओबीटी के प्रेसिडेंट (प्रशासन) आइबी सिंह ने बताया कि कालीन तैयार करने के लिए कंपनी को अक्टूबर 2021 में आर्डर मिला था। सात महीने के अंदर छह हजार स्क्वायर यार्ड एरिया कवर करने के लिए 348 पीस कार्पेट तैयार करने को कहा था। 6 महीने में ही हस्त निर्मित कालीन तैयार कर मई 2022 में भेज दिया था। सेंट्रल विस्टा के लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में कालीन की फीडिंग के लिए यहां से श्रमिकों को भेजा गया था। यह काम भी पूरा हो गया है। कालीन की डिजाइन सेंट्रल विस्टा तैयार कर रही एजेंसी की ओर से उपलब्ध कराई थी। बता दें की (obeetee)ओबीटी कंपनी इंग्लैंड की है।
Published on:
26 May 2023 01:31 pm
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