
गाजी मियां के मेले की शुरुआत बहराइच से होती है। जहां जंग में शहीद होने के बाद सैयद सालार मसऊद गाजी की कब्र बनाई गई थी। वह कब्र अब एक विशाल दरगाह की स्वरूप ले चुकी है। उनके अनुयायियों ने उनकी दरगाह पर पहले बहराइच में मेले की शुरुआत की जो हर वर्ष जेठ के महीने में लगता है। जहां पहुंचने वाले हिंदू मुस्लिम समुदाय के लोग रौजे पर चादर चढ़ा व माथा टेककर अपनी मुरादें पूरी करते हैं।
बताया जाता है कि बहराइच में मेले की शुरुआत के कुछ वर्ष के बाद धीरे-धीरे मेले का देश के कुछ अन्य शहरों में भी विस्तार हो गया। भदोही भी उन्हीं चुनिंदा शहरों में से एक है। भदोही-जौनपुर की सीमा पर भदोही शहर के मर्यादपट्टी में गाजी मियां का रोजा स्थित है। उसके आसपास खाली पड़ी जमीन पर हर वर्ष जेठ महीने की चिलचिलाती धूप व गर्मी में दो दिन का मेला लगता है।
मेले में जिले के अलावा आसपास जनपदों से हजारों की संख्या में हिंदू-मुस्लिम श्रद्धालु रोज़े पर चादर चढ़ाने ,माथा टेकने और मन्नत मांगने पहुंचते हैं। उसी दौरान हर वर्ष मेले के मौके पर उनकी बारात भी धूमधाम से निकलती है। वर्तमान में भदोही में यह मेला दो दिन के बजाय चार दिन का होने लगा है। मेले में दिन-रात लोगों का हूजूम उमड़ता दिखाई पड़ता है।
मेले की समाप्ति के बाद मेला कालीन नगरी के कटरा बाजार में स्थानांतरित हो जाता है। जहां मेले का स्वरूप बदल कर मीना बाजार का स्वरूप ले लेता है मीना बाजार में महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधन से जुड़ी लगभग सभी चीजें उपलब्ध होती हैं। इस दिन मेले के अंदर प्रवेश करने की अनुमति महिलाओं को ही मिलती है।
मीना मेले के अंदर महिलाओं की भारी भरकम मौजूदगी के बीच बाहर चप्पे-चप्पे पर महिला व पुरुष पुलिस कर्मियों की भारी तैनाती देखी जा सकती है। मेले का चौथा दिन नगर के गाजिया रेलवे क्रॉसिंग पहुंच कर समाप्त हो जाता है। चार दिन तक लगने वाला यह मेला छोटे दुकानदारों के लिए सौगात लेकर आता है।
Published on:
08 Feb 2024 05:56 pm
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