भदोही. देश मे गांवों और शहरों में लगने वाले तमाम मेलों में तरह तरह की परंपरा और रिवाज देखने को मिलता है। कई मेलों में ऐसी भी परम्पराएं देखने को मिलती हैं जिसे देखने, जानने और सुनने के बाद हर कोई आश्चर्यचकित हो उठता है। काशी-प्रयाग के मध्य बसे भदोही जिले में भी कजली के पर्व पर भी एक ऐसे मेले का आयोजन होता है जिसके बारे में जानने के बाद हर कोई आश्चर्यचकित हो उठता है। आज के दिन लगने वाले इस मेले में दो गांव की बेटियां पहले आपस मे जमकर झगड़ा करती हैं उसके बाद सभी साथ मे मेले का आनन्द लेती हैं।
झगड़े के दौरान मेले में महिलाएं एक दूसरे को ललकारती हैं। बुरा-भला कहती हैं। हांथो में डंडे और चप्पलों के साथ एक दूसरे को ऐसे ललकारती हैं कि लगता है किसी वक्त इनके बीच जूतम पैजार हो जाएगी लेकिन इस परंपरा के निर्वहन के बाद पूरा मामला शांत हो जाता है और सभी मेले में शामिल हो जाते हैं। इस मेले की एक खासियत है कि यहां पुरुषों का प्रवेश वर्जित होता है। भदोही जिले के सुरियावां थाना क्षेत्र के भोरी-महजूदा में सैकड़ो वर्ष से लगने वाले इस अनोखे मेले को लेकर भी एक कहानी है। ऐसा कहा जाता है कि इस गांव में एक व्यक्ति अपने बेटी के घर तीज लेकर जा रहा था। तब इसी गांव के बगीचे में कुछ लड़कियों ने उसे रोक लिया और उससे कजली गाने की फरमाइश पेश कर डाली। लेकिन फरमाइस पूरी करने में वह व्यक्ति असमर्थ रहा जिसके बाद उसे बगीचे में एक खाट पर बांध दिया गया और उसे गुदगुदी कर तब तक हंसाया गया जब तक उसकी जान नही चली गयी।
कुछ दिनों बाद वह व्यक्ति गांव के लड़कियों के सपने में आया और कहा कि कजरी पर्व पर यहां गांव की बेटियां कजरी नही गाएंगी तो वह सबको परेसान करेगा। इसी के बाद पूर्वांचल के प्रसिद्ध कजरी पर्व पर इस मेले का आयोजन किया जाने लगा जिसमे बगीचे में दो गांव भोरी और महजुदा कि बेटियां पहले इस मेले में शामिल होकर कजरी गाती हैं और फिर मामले झगड़े और जूतम पैजार तक पहुंच जाता है। बीते कुछ वर्षों से महिलाओं के इस रणक्षेत्र में महिला पुलिस की भी तैनाती होने लगी ताकि मामला न बिगड़ने पाए। लोग बताते हैं कि पहले दोनों तरफ की महिलाओं की ओर से पत्थरबाजी भी हो जाती थी।
By – Mahesh Jaisawal