
श्रीकृष्ण के लाइफ मैनेजमेंट के सूत्र : फोटो सोर्स : AI Grok
Janmashtami : देश दुनिया में जन्माष्टमी की धूम शुरु हो चुकी है। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर मुख्य पूजा रात को की जाएगी पर घरोेें-मंदिरों में जय कन्हैया लाल की… के स्वर सुबह से ही गूंज रहे हैं। व्रत रखकर लोग गीता पाठ कर रहे हैं। महाभारत युद्ध के पहले श्रीकृष्ण ने गीता के उपदेश के माध्यम से कर्म की महत्ता प्रतिपादित की थी। वे दरअसल मैंनेजमेंट गुरु थी थे। भगवान कृष्ण के संपूर्ण जीवन में ही लाइफ मैनेजमेंट के अनेक सूत्र छिपे हैं।
आचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार कृष्ण केवल मॉयथोलॉजी के एक पात्र या ईश्वर ही नहीं हैं बल्कि वे मानव चरित्र और व्यवहार में उतारे जाने वाले देव हैं। श्रीकृष्ण के जीवन सूत्रों से जीवन को श्रेष्ठ बनाने की कला सीखी जा सकती है।
बचपन के मित्र सुदामा और उद्धव से लेकर युवावस्था में मिले अर्जुन तक से श्रीकृष्ण ने ताउम्र रिश्ते निभाए। जिन्हें अपना माना, उनका साथ कभी और किसी भी परिस्थिति में नहीं छोड़ा।
श्रीकृष्ण ने जीवनभर अन्याय, अत्याचार का विरोध किया। बचपन में ही कंस से भिड़े। दुर्योधन, जरासंघ आदि की नीतियों के खिलाफ आगे आकर नेतृत्व किया पर कभी भी श्रेय लेने के लिए आगे नहीं आए। हमेशा किंगमेकर की भूमिका निभाई।
श्रीकृष्ण ने हमेशा जन आकांक्षाओं और विकास पर जोर दिया। इसके लिए शांति की महत्ता भी बताई। यही कारण है कि संसार को विभीषिका से बचाने के लिए महाभारत का युद्ध टालने की हर संभव कोशिश की। कौरवों और पांडवों के बीच मध्यस्थता कर यह समझाने का प्रयास किया कि शांति का मार्ग ही उचित उपाय है।
श्रीकृष्ण का पूरा जीवन संघर्षमय रहा। उन्होंने समझाया कि अवतारी पुरुष को भी सांसारिक चुनौतियां झेलनी होंगी, इससे कोई मानव नहीं बच सकता। कृष्ण ने परिस्थितियों का हर हाल में सामना करने की सीख दी।
Updated on:
04 Sept 2026 11:06 am
Published on:
04 Sept 2026 11:05 am
बड़ी खबरें
View Allभारत
ट्रेंडिंग
