
-फिजियोथैरेपी और ऑर्थोपेडिक में हर दिन बढ़ रहे गर्दन दर्द के मरीज
भरतपुर. कभी बढ़ती उम्र की समस्या माने जाने वाले गर्दन दर्द और सर्वाइकल संबंधी रोग अब 20 से 40 वर्ष के युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं। शहर के सरकारी और निजी अस्पतालों की फिजियोथेरेपी तथा ऑर्थोपेडिक ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चिकित्सकों का कहना है कि लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप पर काम करना, गलत पॉश्चर में बैठना, नियमित व्यायाम का अभाव और घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहने की आदत इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं। चिकित्सक बताते हैं लगातार कई घंटे तक मोबाइल पर झुककर देखना, लैपटॉप को आंखों के स्तर से नीचे रखकर काम करना और बीच-बीच में ब्रेक नहीं लेना गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। वर्क फ्रॉम होम के बाद स्क्रीन टाइम में भी बढ़ोतरी हुई है, इससे युवाओं में सर्वाइकल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इससे मांसपेशियों में खिंचाव, अकडऩ और सर्वाइकल डिस्क पर असर पड़ता है। कई लोग दर्द को सामान्य मान दर्द निवारक दवाइयों से काम चलाते रहते हैं, इससे समस्या धीरे-धीरे बढ़ जाती है।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
-गर्दन में लगातार दर्द
-गर्दन में अकडऩ
-सिरदर्द
-कंधों तक दर्द फैलना
-हाथों में झुनझुनी
-हाथों में सुन्नपन महसूस होना
-हाथों में कमजोरी महसूस होना
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बचाव ही सबसे बेहतर उपाय
-लगातार 30 से 40 मिनट बैठने के बाद कुछ मिनट का ब्रेक लें
-मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखकर इस्तेमाल करें
-लैपटॉप/कंप्यूटर की स्क्रीन को आंखों की सीध में रखें
-नियमित योग और स्ट्रेचिंग को दिनचर्या में शामिल करें
-रोज कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें (वॉक/एक्सरसाइज)
-सही बैठने की मुद्रा (पोश्चर) अपनाएं
-लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें
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ज्यादातर युवाओं को समस्या: डॉ. वीएन शर्मा
-गर्दन दर्द की शिकायतें अधिकतर 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में थीं, लेकिन अब कॉलेज विद्यार्थियों, आईटी प्रोफेशनल, बैंक कर्मचारी, निजी कंपनियों में कार्यरत युवाओं और वर्क फ्रॉम होम करने वालों में भी यह समस्या तेजी से सामने आ रही है। हर सप्ताह ऐसे 50 से ज्यादा युवाओं के मामले आते हैं। फिजियोथेरेपी में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या गर्दन, कंधे और ऊपरी पीठ के दर्द से पीडि़त युवाओं की है। इसके अलावा बरसात के मौसम में सुबह उठने पर हाथ-पैरों और कमर में जकडऩ को नजर अंदाज न करें। यह मुख्य रूप से बैरोमेट्रिक दबाव में गिरावट के कारण होती है। जो रुमेटॉइड आर्थराइटिस, ऑस्टियोआर्थराइटिस या एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस की ओर संकेत कर सकता है। बरसात में हवा में ठंडक और नमी बढऩे से शरीर में वात दोष बढ़ता है, जिससे मांसपेशियां और नसें सिकुड़ जाती हैं। जो जोड़ों में जम जाते हैं और सुबह की जकडऩ पैदा करते हैं। रात भर निष्क्रिय रहने और नमी के कारण जोड़ों के आसपास के ऊतकों में कड़ापन आ जाता है। हल्के गर्म तेल या तिल के तेल से जोड़ों और कमर की मालिश करें। सुबह उठकर हल्के व्यायाम और स्ट्रेचिंग करें ताकि जकडऩ खुले। दिनभर गुनगुना पानी पिएं और पचने और आईआर लैंप से सिकाई करें
डॉ. वीएन शर्मा, वरिष्ठ फिजियोथैरेपिस्ट
Updated on:
15 Aug 2026 06:01 am
Published on:
15 Aug 2026 06:01 am
