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राजस्थान में भी अयोध्या के राम मंदिर जैसा डोनेशन स्कैम, सोने-चांदी के आभूषण सहित बिना रसीद चढ़ा करोड़ों का चढ़ावा, अब हुआ खुलासा

Bharatpur के श्रीबांके बिहारीजी मंदिर में 1 साल से नहीं कटी चढ़ावे की रसीद। अयोध्या राम मंदिर डोनेशन स्कैम जैसी लचर व्यवस्था से भक्त परेशान, पुजारी के भरोसे स्टॉक रजिस्टर।
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Bharatpur Banke Bihari Ji Temple Donation Controversy Devsthan Department

Bharatpur Banke Bihari Ji Temple Donation Controversy - AI PIC

राजस्थान में धार्मिक आस्था और वित्तीय हिसाब-किताब की पारदर्शिता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने देवस्थान विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, भरतपुर के प्रसिद्ध श्रीबांके बिहारीजी मंदिर में आने वाले लाखों रुपए के चढ़ावे का कोई पुख्ता सरकारी या डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। मंदिर में पिछले 1 साल से भक्तों को दान की रसीद न मिलना और पूरा स्टॉक रजिस्टर विभागीय कर्मचारियों के बजाय केवल मंदिर के पुजारी के भरोसे छोड़ देने के इस गंभीर मामले ने देश के बहुचर्चित अयोध्या राम मंदिर डोनेशन स्कैम के दौरान सामने आई लचर वित्तीय व्यवस्थाओं और रिकॉर्ड मेंटेनेंस की कमियों की यादें ताजा कर दी हैं।

श्रद्धालु अब इस अव्यवस्था की तुलना अयोध्या के उस विवादित मामले से कर रहे हैं जहां दान के नाम पर सिस्टम की ढिलाई का फायदा उठाने के आरोप लगे थे। भरतपुर के इस सबसे बड़े आय स्रोत वाले मंदिर में भगवान के दरबार का पूरा लेखा-जोखा इस समय पूरी तरह बे-हिसाब नजर आ रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है।

1 साल से नहीं कटी चढ़ावे की रसीद, सरकारी कर्मचारी के बिना चल रहा काम

देवस्थान विभाग की आय का सबसे बड़ा जरिया होने के बावजूद श्रीबांके बिहारीजी मंदिर में चढ़ावे का हिसाब-किताब पूरी तरह संदेह के घेरे में आ गया है। मंदिर में हर महीने लाखों रुपए की नकदी और सोने-चांदी के आभूषण आते हैं।

आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 2026 में अब तक 21 लाख रुपए से अधिक की नकदी चढ़ावे के रूप में मिल चुकी है, जिसमें दानपेटी की राशि भी शामिल है।

स्थानीय भक्तों का साफ आरोप है कि उन्हें दान की कोई रसीद नहीं दी जाती, वहीं देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त मुकेश मीणा का दावा है कि कोई भक्त खुद ऑफिस आकर रसीद मांगता ही नहीं है।

वहीं, नियमों के मुताबिक विभाग को रसीद काटने और रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए यहां सरकारी कर्मचारी तैनात करना होता है, लेकिन नए पुजारी की नियुक्ति के बाद से सारा काम बिना किसी स्वतंत्र सरकारी मॉनिटरिंग के केवल एक रजिस्टर में एंट्री करके चलाया जा रहा है। दानपेटी भी ऐसी जगह रखी गई है कि लोग पैसे बाहर ही छोड़ जाते हैं।

अभी तक नहीं सुलझा रहस्यमयी 'हीरा प्रकरण'

भरतपुर का यह प्रसिद्ध मंदिर पहले भी वित्तीय अनियमितताओं और कीमती सामान के गायब होने के चलते विवादों में घिर चुका है, जिसका निपटारा अब तक नहीं हो सका है।

हीरे जैसा नग लिखकर हुई एंट्री: रणजीत नगर की रहने वाली महिला श्रद्धालु मीरा ने मंदिर में एक कीमती हीरा चढ़ाया था, लेकिन विभागीय कर्मचारियों ने रजिस्टर में उसे 'हीरे जैसा नग' लिखकर एंट्री की। जब बाद में बिल पेश कर रसीद मांगी गई, तो विभाग मुकर गया।

प्रमाणिकता जांच की कमेटी फेल: इस हीरे की असलियत सिद्ध करने के लिए एक विशेष जांच कमेटी का गठन भी किया गया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक इस हीरे का असली सच सामने नहीं आ पाया है कि वह असली हीरा था या कोई साधारण कांच का टुकड़ा।

दबाव बनाकर जबरन वसूली का आरोप

घासीराम कॉलोनी के मनोज और रणजीत नगर के अनिल अग्रवाल जैसे स्थानीय भक्तों ने बताया कि अब मंदिर में अपनी इच्छा से दान-दक्षिणा करना भी मुश्किल हो गया है।

सामान और दक्षिणा की फिक्स डिमांड: भक्तों का आरोप है कि पोशाक और फूल-बंगला चढ़ाने पर पुजारी द्वारा जबरन 1200 रुपए का अतिरिक्त सामान, दो किलो मिठाई और 1100 रुपए की फिक्स दक्षिणा की मांग की जाती है।

पहले जैसी व्यवस्था की मांग: श्रद्धालुओं का कहना है कि पूर्व में ऐसा कभी नहीं होता था और भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार स्वेच्छा से दान देते थे। इस प्रकार की व्यावसायिक वसूली और अयोध्या डोनेशन स्कैम जैसी प्रशासनिक लचरता के कारण मंदिर की छवि खराब हो रही है, जिसे सरकार को तुरंत दुरुस्त करना चाहिए।