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जाट आरक्षण: अब केन्द्रीय ओबीसी आयोग की टीम करेगी गांवों का निरीक्षण

भरतपुर-धौलपुर के जाटों को आरक्षण देने के मामले को लेकर अब कार्रवाई आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि पिछले लंबे समय से आरक्षण को लेकर आंदोलन कर रहे समाज की मेहनत भी रंग लाने वाली है।

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भरतपुर। भरतपुर-धौलपुर के जाटों को आरक्षण देने के मामले को लेकर अब कार्रवाई आगे बढ़ रही है। यही कारण है कि पिछले लंबे समय से आरक्षण को लेकर आंदोलन कर रहे समाज की मेहनत भी रंग लाने वाली है। अब इस माह या मार्च माह के प्रथम सप्ताह में केन्द्रीय ओबीसी आयोग की एक टीम भरतपुर व धौलपुर के कुछ गांवों का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाएगी। ताकि राजस्थान राज्य ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर निरीक्षण कर दूसरी फाइनल रिपोर्ट तैयार कर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मंत्रालय को सिफारिश कर भेजी जा सके।

इसके बाद मंत्रालय की ओर से प्रस्ताव बनाकर लोकसभा को भेजा जाएगा। ताकि उसे पारित कराया जा सके। जानकारी के अनुसार राजस्थान में 33 जिले हैं। इनमें 31 जिलों के जाटों को केन्द्र में आरक्षण का लाभ प्राप्त है, लेकिन भरतपुर-धौलपुर जिलों के जाटों को केन्द्र में आरक्षण से वंचित रखा गया है। इसके अलावा इन दोनों जिलों के जाटों को 2015 में राज्य में भी आरक्षण से वंचित कर दिया था, लेकिन सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर वापस 2017 में इन दोनों जिलों के जाटों को राज्य में आरक्षण का लाभ प्राप्त हुआ और उसके बाद अब केन्द्र सरकार में आरक्षण की मांग जा रही है।

अब बताते हैं कि भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के पदाधिकारी सांसद डॉ. मनोज राजौरिया के नेतृत्व में दो बार केंद्रीय ओबीसी आयोग से मिल चुके हैं। अध्यक्ष भगवानदास साहनी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल आगामी कुछ दिनों में दोनों जिलों में आकर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट बनाएगा। हालांकि इससे पहले राजस्थान राज्य ओबीसी आयोग भी इस तरह का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाकर केंद्र सरकार को भेज चुका है।