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जाट आरक्षण आंदोलन में बड़ी उथल-पुथल…गुटबाजी के बीच अब दोनों गुटों की परीक्षा

-एक ने महापड़ाव का किया ऐलान, दूसरे गुट की महापंचायत-भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण आंदोलन

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जाट आरक्षण आंदोलन में बड़ी उथल-पुथल...गुटबाजी के बीच अब दोनों गुटों की परीक्षा

जाट आरक्षण आंदोलन में बड़ी उथल-पुथल...गुटबाजी के बीच अब दोनों गुटों की परीक्षा

भरतपुर-धौलपुर व डीग जिले के जाट समाज को केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण की मांग को लेकर हो रहे आंदोलन के बीच अब शनिवार को दूसरे गुट की ओर से राज गार्डन मैरिज होम में महापंचायत की जाएगी। महापंचायत का नेतृत्व खुद पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह कर रहे हैं, जबकि पहले गुट का महापड़ाव जयचोली के पास 17वें दिन भी जारी रहा। यह महापड़ाव भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से किया जा रहा है।
महापड़ाव की अध्यक्षता अध्यक्षता महाराजसिंह फौजदार कटारा ने की। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेमसिंह फौजदार ने महापड़ाव को संबोधित करते हुए कहा कि जाट समाज का आन्दोलन गांधीवादी तरीके से चल रहा है। सरकार और संघर्ष समिति के बीच केंद्र में वार्ता के लिए तय हुआ था। शायद दो फरवरी की तारीख तय थी, लेकिन आज वार्ता के लिए कोई संदेश नहीं मिला है। इससे सरकार की उदासीनता नजर आ रही है। सरकार जानबूझकर उग्र आंदोलन करवाने को जाट समाज को बेबस कर रही है। इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। अब समाज दूसरे तरीके से आंदोलन करने को जा रहा है। जटमासी और डहरा मोड के पड़ाव से जाट समाज की सरदारी जयचोली आएगी। पड़ाव सांकेतिक रूप से जारी रहेंगे। शनिवार को जयचोली महापड़ाव में बड़ा निर्णय लिया जाएगा। समाज अपने वायदे पर खड़ा रहा है, लेकिन सरकार ने वायदा तोड़ा है। इसका परिणाम भी सरकार को भुगतना पडेगा। जाट समाज आर-पार की लड़ाई का संकल्प लेकर आंदोलन के लिए बैठा है। वहीं दौलत फौजदार ने महापड़ाव को संबोधित करते हुए कहा कि समाज एकजुट होकर अपने बच्चों के भविष्य के हक के लिए आंदोलन कर रहा है और जीत तय है। सरकार समय रहते आंदोलन को गम्भीरता से ले। जयसिंह हवलदार ने कहा कि जाट समाज ने भाजपा को एकजुट होकर वोट दिया है। अगर सरकार ने धोखा किया तो घर-घर जाकर भाजपा के खिलाफ झोली फैलाकर वोट मांगेंगे। महापड़ाव को धर्मेन्द्र सोलंकी, सतवीरसिंह, बेबी, गीता, सुराज, आदर्श चौधरी, नारायणसिंह, कर्णसिंह, ईश्वरसिंह लुधवाई, गंगाराम मदरियापुरा, धर्मेंद्रसिंह एडवोकेट, सुभाष सरपंच, कैप्टन जयसिंह, धर्मेंद्र पुराबाईखेड़ा आदि वक्ताओं ने अपने विचार रखे। संचालन यतेंद्रसिंह ने किया।