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नींबू के दामों से खिले किसानों के चेहरे, उत्पादन में बीस साल का रिकॉर्ड टूटा

भरतपुर के भुसावर उपखण्ड सहित दो दर्जन से अधिक गांवों में करीब 700 हेक्टेयर भूमि पर नींबू की बागवानी की जा रही है।

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मोहन जोशी/भुसावर। भरतपुर के भुसावर उपखण्ड सहित दो दर्जन से अधिक गांवों में करीब 700 हेक्टेयर भूमि पर नींबू की बागवानी की जा रही है। नींबू की पैदावार व भावों ने पिछले 20 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। बम्पर पैदावार के बावजूद बाजार में अच्छी मांग होने से किसानों से अच्छे दाम मिले हैं। किसान व व्यापारी दोनों के ही चेहरे खिले हुए हैं। यहां के नींबू की मांग देश के कई राज्यों में है। कस्बा भुसावर,नयावास, दीवली, सिरस, रणधीरगढ, वैर, नयावास, भोपर, छौंकरवाडा कलां, बिजवारी, नरहपुर, सैन्दली, भगवानपुर, वौराज, नाथू का नगला आदि स्थानों पर नींबू की बागवानी की जाती है।

नींबू का उपयोग चूर्ण व अचार बनाने में भी
अचार-मुरब्बा के उत्पादन से जुड़े प्रहलाद गुप्ता ने बताया कि भुसावर में नींबूं व आम की बागवानी खूब होती है। अच्छी गुणवत्ता के चलते यहां पैदा हुए नींबू का उपयोग चूर्ण व अचार बनाने में किया जाता है।

खाद्य पदार्थ के रखरखाव के उपाय नाकाफी
भुसावर में नींबू के अचार-मुरब्बे के अलावा कई प्रकार के खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं। नींबू की बागवानी कर रहे कृषक व इसके व्यापारियों को मलाल इस बात का है कि प्रदेश व जिले में सर्वाधिक भुसावर-वैर उपखण्ड में नींबू की बागवानी होती है, उसके बावजूद नींबू के फल व उससे बनने वाले अचार-मुरब्बा व अन्य खाद्य पदार्थ के रखरखाव व सुरक्षा के उपाय के साधन नहीं हैं। वर्ष 2012 में ही खाद्य प्रसंस्करण केन्द्र स्वीकृत हो गया था, जिसका नदबई के गांव खटोटी के पास भूमि का चयन हुआ, लेकिन 9 साल के बाद भी केवल चारदीवारी का ही निर्माण हो पाया।