
मथुरा गेट पुलिस स्टेशन। फोटो: पत्रिका
भरतपुर। मथुरा गेट थाना क्षेत्र स्थित सूरजमल नगर में गाय को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक नाबालिग बच्ची की मौत के बाद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मृतका के परिजनों ने पुलिस पर एक तरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा है कि जेल भेजे जाने से बच्ची मानसिक तनाव में थी और जमानत पर रिहा होने के कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। आरबीएम अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले ने पुलिस कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
भरतपुर के मथुरा गेट थाना क्षेत्र के सूरजमल नगर में तीन महीने पहले गाय को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था। दोनों पक्षों ने थाने में मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने केवल उनके पक्ष के पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि दूसरे पक्ष के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
परिजनों के अनुसार मृतका अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ 26 मई को जेल भेजी गई थी। उनका कहना है कि जेल जाने और पुलिस की कथित एकतरफा कार्रवाई से बच्ची मानसिक तनाव में रहने लगी थी। 19 जुलाई को जमानत मिलने के बाद वह घर लौटी, लेकिन उसी शाम अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे तत्काल आरबीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है।
मृतका के रिश्तेदार सुरेंद्र सिंह ने बताया कि 3 मई को पड़ोसी परिवार की महिलाएं उनके घर के बाहर बंधी गाय को खोलकर ले गई थीं। गाय वापस मांगने पर विवाद बढ़ गया। बाद में दूसरे पक्ष ने एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया। परिवार का आरोप है कि 11 मई को कार्रवाई की मांग को लेकर मृतका, उसकी मां और बहन पानी की टंकी पर भी चढ़े थे, लेकिन पुलिस ने आश्वासन देने के बाद उन्हें नीचे उतारकर बाद में बयान के बहाने बुलाकर जेल भेज दिया। परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करती तो बच्ची की जान नहीं जाती। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दूसरे पक्ष के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।
Updated on:
22 Jul 2026 12:39 pm
Published on:
22 Jul 2026 12:39 pm
