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कांग्रेस में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री के सामने नहीं रखी कोई शर्त

जिले की नदबई विधानसभा से करीब एक साल पहले बसपा की टिकट पर विधायक बने और पिछले दिनों पार्टी के आधा दर्जन विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हुए विधायक जोगिन्दर सिंह अवाना इन दिनों चर्चा में है।

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कांग्रेस में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री के सामने नहीं रखी कोई शर्त

कांग्रेस में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री के सामने नहीं रखी कोई शर्त

भरतपुर. जिले की नदबई विधानसभा से करीब एक साल पहले बसपा की टिकट पर विधायक बने और पिछले दिनों पार्टी के आधा दर्जन विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हुए विधायक जोगिन्दर सिंह अवाना इन दिनों चर्चा में है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जल्द मंत्रिमण्डल विस्तार करने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि मंत्रिमण्डल में कांग्रेस में शामिल हुए इन छह विधायकों में से दो को सरकार में मंत्री पद दिया जा सकता है। इसमें नदबई विधायक अवाना का नाम भी सामने आ रहा है। हालांकि, विधायक अवाना कहते हैं कि कांग्रेस में शामिल होने का उद्देश्य केवल क्षेत्र का विकास है, इसको लेकर वह पूरे तन्मयता से जुटे हुए हैं। उनकी कोई लाभ लेनी की कोई मंशा नहीं है। वह कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी हाल के दिनों में मजबूत हुई है। हरियाणा समेत अन्य प्रदेश के चुनाव के नतीजे इसका परिणाम है। विधायक अवाना से 'पत्रिकाÓ ने बदले परिदृश्य को लेकर की वार्ता के प्रमुख अंश।

प्रश्न: बसपा छोड़ अचानक कांग्रेस में शामिल होने का फैसले की क्या वजह रही ?
जवाब: प्रदेश में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर आई। बसपा सुप्रीमो ने कांग्रेस सरकार को समर्थन देने का निर्णय लिया। जिस पर प्रदेश में बसपा के 6 विधायकों का समर्थन सरकार को था। लेकिन लोकसभा चुनाव में प्रदेश में बसपा के प्रत्याशी घोषित करने से कार्यकर्ता असमंजस में बने हुए थे। एक तरफ विधायक सरकार को समर्थन देकर क्षेत्र में विकास कार्य को प्राथमिकता दे रहे थे, दूसरी तरफ कांग्रेस के खिलाफ प्रत्याशी लड़ाने से अटपटी स्थिति थी। इस पर कांग्रेस में शामिल होने से 10 दिन पहले राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम, धर्मवीर अशोक, सीताराम शीला समेत अन्य पदाधिकारियों से पार्टी विधायकों की बैठक हुई। इसमें स्पष्ट कहा कि बसपा या तो समर्थन वापस ले या फिर सरकार में शामिल हो। लेकिन पार्टी ने कोई निर्णय नहीं लिया। जिस पर बाद में सभी विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए।

प्रश्न: कांग्रेस में शामिल होने के लिए कोई शर्त रखी थी क्या?
जवाब: बसपा के सभी विधायकों ने कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और अन्य पदाधिकारियों के सामने कोई शर्त नहीं रखी। खुद उनकी ही पार्टी बसपा ने कांग्रेस में शामिल होने के किए मजबूर कर दिया था। आप दो मुखौटों के साथ काम नहीं कर सकते हैं। एक तरफ सरकार से क्षेत्र के विकास में सहयोग ले रहे हैं तो दूसरी तरफ उनकी खिलाफत कर रहे हैं। एक साथ दो चीजें नहीं हो सकती। केवल क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने पहले ही बजट में उच्चैन में राजकीय कॉलेज व तहसील बनाने का तोहफा दिया।

प्रश्न: नगर निगम चुनाव को लेकर आपसे कोई चर्चा हुई है क्या ?
जवाब: नगर निगम चुनाव को लेकर प्रदेश प्रभारी अविनाश पाण्डे समेत अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों से चर्चा हुई है। उन्होंने भी अपनी तरफ से कुछ उम्मीदवारों के नाम दिए हैं। वह खुद भी पार्टी के लिए शहर में प्रचार करेंगे, पार्टी को निकाय चुनाव में निश्चित ही जीत मिलेगी।

प्रश्न: खुद के विधानसभा क्षेत्र नदबई में कोई बड़ी योजना, जो आपने सोच रखी हो
जवाब: विधानसभा क्षेत्र की जनता उनके लिए सबसे पहले हैं। क्षेत्र में विकास के लिए कई योजनाएं हैं। इसमें मुख्य योजना नदबई में रीको इण्डस्ट्रीज एरिया की स्थापना हो, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके। बेरोजगारी एक बड़ी समस्या है। इसके अलावा क्षेत्र की सड़कों को सुधारना पहली प्राथमिकता है। घटिया कार्य करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।