
मेयर बनाने में पर्दे के पीछे से आप निभाते हैं अहम रोल...पूर्व विधायक बोले- निर्णय पार्टी का होता है, वह तो सहयोग करते हैं
भरतपुर. शहर की सरकार नगर निगम के चुनाव में मुख्य मुकाबला वर्तमान में बोर्ड पर काबिज भाजपा और प्रदेश में सत्ता संभाल रही कांग्रेस पार्टी में है। इसमें भाजपा फिलहाल कांग्रेस से टिकट वितरण में आगे निकल रही और जिन छह सीटों पर पेच फंसा है, इसमें चार पर सोमवार तक निर्णय हो जाएगा। वहीं, शहरी सरकार पर वापस भाजपा का परचम फहराने के लिए एक बार फिर से पूर्व विधायक विजय बंसल सक्रिय नजर आ रहे हैं वह भरतपुर विधानसभा से तीन बार विधायक और एक दफा नगर परिषद में सभापति रह कर शहर की खस्ताहाल सड़कों को सीसी रोड से चमकाने का दावा करते रहे हैं। नगर निगम के चुनाव में वह वापस से पूरे दमखम के साथ भाजपा का झण्डा लहराने के साथ भाजपा का बोर्ड बनाने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, पार्टी में कुछ अंदरुनी गुटबाजी भी नजर आ रही है। खेमेबाजी से पार्टी किस तरह निपटेगी, ये देखना होगा। ऐसे में पूर्व विधायक विजय बंसल से हुईपत्रिका की बातचीत के प्रमुख अंश...
प्रश्न: भाजपा क्या एक बार फिर से नगर निगम में अपना बोर्ड बनवा सकेगी?
जवाब: वर्ष 1994 से अभी तक किसी न किसी रूप में भाजपा नगर परिषद और बाद में नगर निगम में बोर्ड में रही है। भाजपा के पक्ष में एक बार फिर से माहौल है। कांग्रेस के पास कोई रीति-नीति नहीं है, वह पहले आपस में निपट ले, बाद में नगर निगम में बोर्ड बनाने की सोचें। कांग्रेस की नीति में शुरू से ही खोट रहा, पहले उसने निकाय में सीधे प्रक्रिया को झण्डी दी, फिर बगैर चुनाव के ही मेयर व सभापति की नियम बनाकर खरीद-फरोख्त को बढ़ावा दे रही है। इससे सीधे तौर पर कांग्रेस कहीं न कहीं उद्योगपति और पैसों वालों को अपने फायदे के लिए बढ़ावा दे रही है।
प्रश्न: शहर के विकास कार्यों को लेकर कितने वादे पूरे हुए, जिसे पार्टी गिना सकती है।
जवाब: पहली बात नगर परिषद को नगर निगम में क्रमोन्नत भाजपा सरकार में ही कराया गया, इससे शहर के विकास कार्यों को ज्यादा बजट मिल सके। इसका फायदा भी मिला है। भाजपा बोर्ड ने शहर की सुजानगंगा नहर के विकास के कार्य को हरी झण्डी दिलवाई, नंदी गोशाला, सीएफसीडी को अंतिम रूप दिया लेकिन उसमें कोर्ट के आदेश से काम नहीं हो सका। शौचालय और सड़कों का निर्माण कराया गया।
प्रश्न: वर्तमान मेयर शिवसिंह भोंट से आपका तालमेल काफी अच्छा रहा।ये हमेशा चर्चा का विषय रहा, इस तालमेल को किस तरह समझें।
जवाब: वह पहली बार वर्ष 1994 में नगर परिषद में सभापित रहे थे, तभी से उनका चुने हुए जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर तालमेल रहा है। शहर के विकास में वह एक और एक ग्यारह की भावना से मिलकर कार्य करते हैं। मेयर भोंट के साथ बेहतर तालमेल का एकमात्र उद्देश्य शहर का विकास रहा है।
प्रश्न: भाजपा इस बार बोर्ड में कितने पार्षद निश्चित चुनकर आना मान रही है और विरोध को किस रूप में देखते हैं, जिन्हें टिकट नहीं मिला।
जवाब: देखिए पार्टी टिकट वितरण की प्रक्रिया सर्वे और भाजपा मण्डल की ओर से मिले फीडबैक पर लेकर दिए हैं। इस चुनाव में पार्टी के निश्चित तौर पर 35-40 पार्षद विजयी होकर आ रहे हैं। ये मेरा पूर्ण विश्वास है, मैं आपको बता नहीं सकता, वरना नाम भी बता दूं...कौन-कौन जीत कर आ रहा है। हमने इस स्तर पर फीडबैक और सर्वे के आधार पर टिकट वितरित किए हैं।
प्रश्न: मेयर पद को लेकर कोई सहमति बनी या फिर चुनाव के बाद तय होगा?
जवाब: मेयर पद के उम्मीदवार को लेकर भी कोई फाइनल सलेक्शन नहीं हुआ है। इस पर निर्णय होना शेष है। पार्टी में इसका लेकर चर्चा व मंथन का दौर चल रहा है। इसका निर्णय सोच-समझ कर लिया जाएगा। उम्मीद है बेहतर प्रत्याशी मिलेगा।
प्रश्न: कहा जाता है कि सभापति या मेयर बनाने में आपकी भूमिका पर्दे के पीधे से प्रमुख रही, क्या यह सही बात है?
जवाब: ऐसी कोई बात नहीं है। जो भी निर्णय होता है वह पार्टी स्तर पर और उस समय के हालात देखकर होते हैं। इससे पहले के चुनाव में पार्टी स्तर पर चर्चा के बाद ही मेयर शिवसिंह भोंट का नाम तय हुआ था। उस समय भी कुछ लोगों ने विरोध किया, जिस पर हमने 100 फीसदी भाजपा का बोर्ड और सभापति बनाने का भरोसा दिया था। इस पर तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष परनामी ने प्रत्याशी भोंट को हरी झण्डी दे दी थी और हमने बोर्ड बनाकर भरोसा बरकरार रखा था।
प्रश्न: कांग्रेस से आप चुनाव में किस तरह की टक्कर मार रहे हैं। क्योंकि वहां तीन मंत्री भी पूरी तैयारी कर चुके हैं।
जवाब: कांग्रेस पहले अपने अंदुरुनी खींचतान को ही शांत कर ले। कांग्रेस सरकार के निर्णय आमजन के विपरीत हैं। स्टेट टोल वापस शुरू करने का निर्णय आमजन पर सीधे भार डालने वाला है। वहीं, मंत्री डॉ.सुभाष गर्ग जिस पार्टी से चुनाव जीत कर आए हैं, उसका कोई आधार नहीं है। वह एक तरह से सीधे कांग्रेस से हैं और फिर उसी का विरोध करते हैं, ये समझ से परे हैं। काठ का हांड़ी एक बार चढ़ती है, अभी एक साल होने जा रहा है और सबसे अधिक विरोध उनका ही हो रहा है। उनकी आपस में नहीं बन रही है। आप देख सकते हैं।
प्रश्न: भाजपा का बोर्ड होने पर सबसे अधिक विरोध अपनों का ही झेलना पड़ा?
जवाब: पार्टी ने डिप्टी मेयर पद के लिए योग्य उम्मीदवार का चयन किया था। बाद में नगर निगम में उन्हें सफाई कमेटी का अध्यक्ष भी बनाया गया। उनका कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष के साथ मिलकर बोर्ड के निर्णय और मेयर का विरोध करने की भूमिका गलत थी, इसको सही नहीं ठहराया जा सकता।
प्रश्न: मेयर भोंट पर लगातार कमीशन को लेकर आरोप लगते रहे हैं, इसे आप किस तरह देखते हैं
जवाब: मेयर शिवसिंह भोंट पर विकास कार्यों में कमीशन के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने एक पैसा कही भी नहीं लिया। कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ और फायदे के लिए इस तरह के आरोप लगाते रहते हैं।
Published on:
04 Nov 2019 04:03 am
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