
अब प्रत्येक बाल मृत्यु की कमेटी के माध्यम से होगी समीक्षा
भरतपुर. राज्य में बाल मृत्यु दर पर समीक्षा रिपोर्ट तैयार करने के लिए चाइल्ड डेथ रिव्यू होगा। इसके तहत मृत्यु का मेडिकल, सामाजिक कारण एवं होने वाली देरी के बारे में जानना, साथ ही इन कारणों की पुनरावृति को रोककर भविष्य में इन कारणों से होने वाली मृत्यु को रोकना है। इसे लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से सोमवार को जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण जिला स्तरीय प्रशिक्षक डॉ. अमर सिंह सैनी, कौशल कुमार एवं प्रदीप कुमार पांडेय ने दिया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. लक्ष्मण सिंह ने बताया कि बाल मृत्यु दर की समीक्षा दो स्तर से होगी। एक कम्युनिटी लेवल और दूसरी फेसिलिटी बेस्ड यानि चिकित्सा संस्थानों के स्तर पर की जाएगी। शिशु मृत्यु दर को लेकर किए जाने वाले रिव्यू में आशा सहयोगिनी, एएनएम, पीएचसी प्रभारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी के साथ साथ उप जिला अस्पताल एवं जिला अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी व मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग का पूरा स्टाफ काम करेगा। जिला कार्यक्रम प्रबंधक कौशल कुमार ने बताया कि यह समीक्षा 0 से 28 दिन तक एवं 29 दिन से पांच वर्ष के बच्चों की हुई मृत्यु जो कि घर/रास्ते/परिवहन अथवा अस्पताल में हुई है उसकी विस्तुत समीक्षा होगी। समीक्षा समुदायिक एवं संस्थान स्तर पर होगी। घर, परिवहन एवं मार्ग दौरान हुई मृत्यु की सूचना सर्वप्रथम क्षेत्र की एएनएम एवं आशाएं बाल मृत्यु की रिपोर्ट सेक्टर चिकित्सा अधिकारी को करेंगी एवं संस्थान पर हुई मृत्यु की समीक्षा चिकित्सा संस्थान पर गठित कमेटी करेगी। उन्होनें बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में गत वर्ष बाल मृत्यु के आंकड़ों में वृद्धि हुई है, इनमें कमी लाने के लिए बाल मृत्यु समीक्षा कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इससे क्षेत्र के अन्य बच्चों की संबंधित कारणों से हुई मृत्यु से निजात मिलेगी। कार्यक्रम के जिले पर जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी नोडल अधिकारी होंगे एवं खंड पर खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं संस्थान पर संस्थान प्रभारी नोडल अधिकारी होंगे। प्रदीप कुमार पांडे ने बताया कि कार्यक्रम के तहत सामुदायिक स्तर पर जिले में होने वाली सभी मृत्यु की समीक्षा की जानी है। इसके तहत शिशु मृत्यु जो कि घर, रास्ते एवं परिवहन के दौरान हुई है एवं संस्थान स्तर पर प्रथम चरण में वह सभी चिकित्सा संस्थान शामिल किए जाने हैं जहां प्रतिवर्ष 500 से अधिक प्रसव हो रहे हैं अथवा एसएनसीयू कार्यरत है। जिला आईईसी समन्वयक राममोहन जांगिड़, जिला जिला नोडल अधिकारी दीपक शर्मा आदि उपस्थित थे।
मिलेगी प्रोत्साहन राशि
प्रदीप पांडेय ने बताया कि मृत्यु की सूचना देने एवं नोटिफिकेशन कार्ड भरकर देने पर आशा सहयोगिनी को 50 रुपए, प्रथम संक्षिप्त रिपोर्ट भरकर देने पर एएनएम को 100 रुपए, टीम की ओर से विस्तृत समीक्षा करने पर मानदेय एवं मोबिलिटी के रूप में 500 रुपए एवं जिला स्वास्थ समिति की बैठक में शिशु के परिजनों की ओर से भाग लेने पर 200 रुपए मोबिलिटी सपोर्ट के रूप में नियमानुसार खाते में भुगतान किया जाएगा।
Published on:
08 Mar 2022 11:09 am
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