
कार्तिक शर्मा (फोटो-पत्रिका)
भरतपुर। कभी जिस मैदान ने एक पिता से उसका सपना छीन लिया था, उसी सपने ने बेटे को देशभर में पहचान दिला दी। कुछ सपने मैदान पर पूरे नहीं हो पाते, लेकिन वे पीढ़ियों तक जीवित रहते हैं और एक दिन बड़ी उड़ान भरते हैं। राजस्थान के छोटे से शहर भरतपुर के दारापुर गांव की यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यहां एक पिता का क्रिकेटर बनने का अधूरा सपना बेटे की शानदार सफलता बनकर सामने आया।
19 साल के कार्तिक शर्मा को आईपीएल-2026 के मिनी ऑक्शन में चेन्नई सुपर किंग्स ने 14.20 करोड़ रुपए की रेकॉर्ड बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल किया। यह रकम न सिर्फ कार्तिक की प्रतिभा की कीमत है, बल्कि उनके पिता मनोज शर्मा के वर्षों के त्याग, संघर्ष और जिद की जीत भी है।
मनोज शर्मा खुद कभी एक तेज गेंदबाज थे। वे मैदान पर अपनी पहचान बनाने की राह पर थे, लेकिन कंधे की गंभीर चोट ने उनका करियर समय से पहले खत्म कर दिया। सपनों के टूटने का दर्द उन्हें तोड़ नहीं सका। उल्टे, उन्होंने ठान लिया कि जो मुकाम उन्हें नहीं मिला, वह उनके बच्चे जरूर हासिल करेंगे, चाहे बेटा हो या बेटी। मनोज बताते हैं कि "मैंने कभी हार नहीं मानी। मैंने सोचा कि मेरा अधूरा सपना मेरा बच्चा पूरा करेगा।"
पिता मनोज ने बताया कि कार्तिक महज ढाई साल के थे तभी उन्होंने उनके हाथ में बल्ला थमा दिया। घर का आंगन ही उनका पहला क्रिकेट मैदान बना। करीब पांच साल तक कार्तिक ने घर पर ही पिता से बुनियादी ट्रेनिंग ली। मनोज शर्मा कहते हैं कि छोटी उम्र में ही कार्तिक की समझ और तकनीक ऐसी थी कि हर कोई हैरान रह जाता था। मनोज खुद घंटों गेंदबाजी करते और बेटे को क्रिकेट की बारीकियां सिखाते थे।
उन्होंने बताया कि शुरुआती ट्रेनिंग के बाद कार्तिक को भरतपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव शत्रुघ्न तिवारी के पास भेजा गया। कुछ साल ट्रेनिंग देने के बाद तिवारी ने कहा कि इस बच्चे का स्तर भरतपुर से ऊपर है। बेहतर कोचिंग के लिए परिवार ने बड़ा फैसला लिया और कार्तिक को आगरा ले गए। वहां दीपक चाहर के पिता लोकेंद्र सिंह चाहर की अकादमी में उन्हें बेहतर माहौल और कोचिंग मिली।
मनोज शर्मा ने बताया कि कार्तिक की पावर हिटिंग और लंबे छक्के मारने की कला यहां निखरी। वे केविन पीटरसन जैसे शॉट्स लगाने के लिए मशहूर हो गए। कार्तिक विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और घरेलू क्रिकेट में तूफानी बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनका स्ट्राइक रेट 160 से ऊपर रहा। राजस्थान की अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 टीमों में खेल चुके कार्तिक अब सीएसके में महेंद्र सिंह धोनी के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करेंगे।
पिता मनोज शर्मा बताते हैं कि कार्तिक को इस मुकाम तक पहुंचाने का सफर आसान नहीं था। वे प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाकर परिवार चलाते थे, लेकिन जब बेटे की प्रैक्टिस प्रभावित होने लगी तो उन्होंने ट्यूशन भी छोड़ दी। क्रिकेट किट, ट्रेनिंग और यात्रा के खर्च के लिए उन्होंने अपनी जमीन और दुकान तक बेच दी। यहां तक कि 27-28 लाख रुपए का कर्ज भी लेना पड़ा। मां ने भी गहने बेचकर मदद की। मनोज ने बताया कि घर बाबा की पेंशन से चलता था। मनोज के तीन बेटे हैं, जिनमें से दो क्रिकेट खेलते हैं। वे कहते हैं, "मेरा सपना है कि मेरे बेटे देश के लिए खेलें और भारत का नाम रोशन करें।"
16 दिसंबर 2025 को अबू धाबी में हुए ऑक्शन में कार्तिक की बेस प्राइस सिर्फ 30 लाख थी, लेकिन आईपीएल टीमों के बीच जोरदार बोली लगी और आखिर में सीएसके ने 14.20 करोड़ में उन्हें खरीद लिया। यह रकम अनकैप्ड खिलाड़ी के लिए रेकॉर्ड है। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की कीमत नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, त्याग और विश्वास की जीत थी। छोटे शहर से निकले कार्तिक ने साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकती।
सफलता के बाद कार्तिक बेहद विनम्र नजर आए। बातचीत में उन्होंने कहा कि इस मुकाम के असली हकदार मेरे माता-पिता हैं। उनके विश्वास और बलिदान ने मुझे यहां पहुंचाया, अब उनका सपना आईपीएल से आगे भारतीय टीम तक पहुंचने का है। युवाओं के लिए उनका संदेश साफ है, "मेहनत और अनुशासन से कोई सपना असंभव नहीं।"
IPL ऑक्शन में कार्तिक को बड़ी सफलता मिलने की खबर मिलते ही भरतपुर में खुशी की लहर दौड़ गई। जिला क्रिकेट संघ और विभिन्न समाजों ने कार्तिक और उनके परिवार का भव्य स्वागत किया। पटाखे फोड़े गए, मिठाइयां बांटी गईं। शहर ने अपने इस होनहार बेटे पर गर्व जताया, जिसने पिता के अधूरे सपने को अपनी मेहनत से पूरा कर दिखाया।
Updated on:
17 Dec 2025 07:41 pm
Published on:
17 Dec 2025 07:17 pm
