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500 ग्राम की एक मौसमी: बहुुत खास है अचार के लिए मशहूर राजस्थान के इस कस्बे के बागानों की मौसमी

राजस्थान के भरतपुर जिले के भुसावर क्षेत्र के किसान कम लागत से स्मार्ट फार्मिंग कर ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। पूर्ण जैवकीय तरीके से नारंगी, मौसमी, अमरूद, चीकू की बागबानी करने में लगे हैं। बागान मालिक जगदीश मीणा ने बताया, यहां की मिट्टी अधिक उपजाऊ है।

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भुसावर/मोहन जोशी। राजस्थान के भरतपुर जिले के भुसावर क्षेत्र के किसान कम लागत से स्मार्ट फार्मिंग कर ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। पूर्ण जैवकीय तरीके से नारंगी, मौसमी, अमरूद, चीकू की बागबानी करने में लगे हैं। बागान मालिक जगदीश मीणा ने बताया, यहां की मिट्टी अधिक उपजाऊ है।

इसी के साथ किसान मौसमी में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं करके छाछ, नीम, तम्बाकू की पत्तियां, गोबर की खाद, मुर्गी व चमगादड़ की बीट, वर्मी कम्पोस्ट खाद के सल्फर तत्व आदि डालकर खेती करते हैं। इससे फलोत्पादन अधिक होता है। इस वर्ष मौसमी की बंपर पैदावार हुई है। यहां के बागानों की मौसमी जयपुर, दिल्ली, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों में जाती है। इनका भाव भी ज्यादा मिलता है।

बुवाई का सही समय
मौसमी को तैयार करने के लिए सितंबर से अक्टूबर में इसकी बुवाई ऊंची उठी हुई क्यारियों में की जाती है। जो दो से तीन मीटर लंबी, दो फीट चौड़ी, पांच से 20 सेंटीमीटर जमीन से ऊंची होती है। तीन से चार सप्ताह के बाद इसमें अंकुरण हो जाता है।

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साल में दो बार आते हैं फल
मौसमी यहां के बागानों की मौसमी 400 से 500 ग्राम के वजन तक की होती है। इसमें रस भी ज्यादा निकलता है और मीठी भी होती है। यह सर्दियों में पक कर तैयार हो जाती है। साल में दो बार फल आते हैं।