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बलात्कार पीड़िता ने बयां किया दर्द, बदनामी के डर से सहती रही दरिंदगी, परिवार को मारने की देता था धमकी

डीग जिले की बलात्कार पीड़िता जनाना अस्पताल में बच्चे को जन्म देने के बाद खामोश है। वह हर किसी को आता-जाता देखकर सहम रही है। समाज और परिवार की सुरक्षा की चिंता उसकी आंखों में दिख रही है।

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gangrape in Mumbai

भरतपुर। डीग जिले की बलात्कार पीड़िता जनाना अस्पताल में बच्चे को जन्म देने के बाद खामोश है। वह हर किसी को आता-जाता देखकर सहम रही है। समाज और परिवार की सुरक्षा की चिंता उसकी आंखों में दिख रही है। पुलिस के खिलाफ उसका गुस्सा साफ झलक रहा है।

बलात्कार पीड़िता ने पत्रिका रिपोर्टर को बताया कि एक महीने पहले चार बच्चों के पिता के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। आरोपी बार-बार परिवार को जान से मारने की धमकियां दे रहा था। वह तभी से कहता रहा कि पुलिस के पास जाकर क्या कर लिया। पुलिस कुछ नहीं करेगी। उसने लगता है कि पुलिस को भी खरीद लिया है। साहब हम तो रोज मजदूरी कर अपना पेट भरते हैं, लेकिन वो तो पैसे वाले हैं। पुलिस पैसे वालों की सुनती है। उन्होंने पुलिस को पैसा भर दिया है।

इतना ही कहते ही पीड़िता की आंखों से आंसू बह निकले। बोली कि इसलिए ही तो अभी तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। जनाना अस्पताल में बच्चे का जन्म होने पर मंगलवार को पुलिस को सूचना दी, लेकिन बुधवार को बच्चे के जन्म के बाद तीन पुलिसकर्मी गेट से ही देखकर चले गए, लेकिन पुलिस ने कोई जानकारी तक नहीं की। उसने बताया कि 20 अक्टूबर 2023 का दिन था। जब वह जौं की फसल को देखने व लकड़ी लेने जा रही थी। उसी दौरान घमण्डी पुत्र जगदीश ने गलत काम किया और मोबाइल से अश्लील फोटो खींच लिए।

'किसी से कहा तो पूरे परिवार को मार दूंगा'

जब परिजनों को बताने की धमकी दी तो फोटो वाट्सएप ग्रुपों पर वायरल करने की धमकी दी। बदनामी के डर से किसी से नहीं कहा। दो माह बीत जाने के बाद पेट में दर्द रहने लगा तो पता चला कि वह गर्भवती है। जब इस बारे में आरोपी से कहा तो उसने कहा कि परिवार का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। किसी से कहा तो पूरे परिवार को मार दूंगा। इसके बाद भी वह फोटो वायरल करने की धमकी देकर बलात्कार करता रहा। आरोपी ने 15-20 बार बलात्कार किया। वह कभी भी धमकी देकर बुला लेता था। जब सात माह का बच्चा पेट में था तो परिजन चिकित्सक के पास ले गए और सोनोग्राफी के बाद पता चला। जब तक बच्चा साढ़े सात माह का होने के कारण सफाई नहीं हो सकती थी। इसके बाद थाने गए। जहां 24 घंटे तक रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की गई। उससे पहले डीग एसपी को भी अवगत कराया। आरोपी के साथ पुलिस भी पूरी तरह से दोषी है। दोषी पुलिसकर्मी व पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

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पीड़िता को डर आरोपी पक्ष है दबंग

पीड़िता ने बताया कि आरोपी पक्ष दबंग है और वह कुछ भी कर सकता है। ऐसे में वह डरी हुई है। परिजन कुछ भी बोलने से डरते रहे। उनका कहना था कि जब रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद एक महीने बाद भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है तो वो भी समझ सकते हैं कि आरोपी पक्ष का पुलिस पर कितना दबाव है।

…डीएनए जांच से साफ होगी तस्वीर

अब पुलिस की ओर से डीएनए जांच कराई जाएगी। इसके लिए आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए कुम्हेर पुलिस की ओर से कुछ स्थानों पर दबिश दी गई है, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग सका है। गिरफ्तारी के बाद ही डीएनए जांच को सैंपल लिया जाएगा। पीड़िता के सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उसकी जन्म तिथि आठ जून 2004 अंकित है।