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Bharatpur News: राजकीय मेडिकल कॉलेज का तमगा और हाल ये, 750 विद्यार्थी कर रहे MBBS; पढ़ाने को फैकल्टी तक नहीं

भरतपुर राजकीय मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में 750 विद्यार्थी एमबीबीएस कर रहे हैं, लेकिन इन्हें पढ़ाने के लिए फैकल्टी तक नहीं है।

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Bharatpur Government Medical College

भरतपुर। भरतपुर में संभाग स्तर पर मेडिकल कॉलेज खुले पांच साल से अधिक का समय हो गया है। पुराने अस्पताल के साथ अब यहां 250 बेडेड नया अस्पताल का भवन भी बनकर तैयार हो गया है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में 750 विद्यार्थी एमबीबीएस कर रहे हैं, लेकिन इन्हें पढ़ाने के लिए फैकल्टी तक नहीं है।

मेडिकल कॉलेज व आरबीएम चिकित्सालय में स्टाफ की कमी का प्रभाव चिकित्सा सेवा पर भी पड़ रहा है। सरकार ने यहां मेडिकल कॉलेज तो खोल दिया, लेकिन यहां पर पढ़ाने के लिए पूरी फैकल्टी नहीं है। जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज वर्ष 2017 में शुरू हुआ और वर्ष 2018 में एमबीबीएस के लिए यहां प्रवेश शुरू हो गया। अब 750 विद्यार्थी यहां से एमबीबीएस कर रहे हैं। वहीं करीब 60 विद्यार्थी पीजी भी कर रहे हैं, लेकिन फैकल्टी पूरी नहीं होने से इसका असर आने वाले भविष्य पर पड़ रहा है, लेकिन सरकार के स्तर पर कोई प्रयास होते नजर नहीं आ रहे।

चिकित्सक जा रहे पढ़ाने

मेडिकल कॉलेज में स्टूडेंट्स को पढ़ाने के लिए पूरी फैकल्टी नहीं होने के कारण आरबीएम चिकित्सालय में तैनात चिकित्सकों को यहां से पढ़ाने के लिए मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। इससे यहां चिकित्सा सेवाओं पर भी असर पड़ता है। इसको लेकर स्टूडेंट्स कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।

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यह है फेकल्टी की स्थिति

श्री जगन्नाथ पहाडिय़ा राजकीय मेडिकल कॉलेज में 21 प्रोफेसर में से 8 वर्किंग में हैं, जिसमें से 13 सीट खाली हैं। एसोसिएट प्रोफेसर की 45 सीट हैं, जिसमें 20 सीट भरी हुई हैं। वहीं 25 सीट खाली पड़ी हैं। असिस्टेन्ट प्रोफेसर की 71 सीट हैं, जिनमें से 42 सीट भरी हुई हैं और 29 सीट खाली पड़ी हैं। सीनियर डेमोस्ट्रेटर की 35 सीट हैं, जिनमें से 3 सीट भरी हुई हैं। वहीं 32 सीट खाली पड़ी है। सीनियर रेजीडेंट की 35सीट हैं, जिनमें से 17 सीट भरी हुई हैं और 18 सीट खाली पड़ी है। जूनियर रेजीडेंट की 54 सीट हैं, जिनमें से 31 सीट भरी हुई हैं और 23 सीट खाली हैं। कुल 262 सीट में से 121 सीट भरी हुई हैं। इन 140 सीट खाली होने के कारण इसका असर मेडिकल कॉलेज के साथ आरबीएम चिकित्सालय के मरीजों पर भी पड़ रहा है। यहां से फेकल्टी को पढ़ाने के लिए मरीजों को छोडकऱ मेडिकल कॉलेज में शिक्षण के लिए जाना पड़ता है।