
बांध बारैठा से छोड़ा पानी घुसा खेतों में, फसलों को नुकसान की आशंका
बयाना. जिले के प्रमुख बांध बारैठा से फसल की सिंचाई के लिए नहर के माध्यम से छोड़ा जा रहा पानी नहर के टूटने से खड़ी फसलों में घुस गया, जिससे फसलों को नुकसान की आशंका है। इस पानी को नहर के रास्ते गांवों में मोराओं (आउटलाइट) के माध्यम से निकाला जा रहा है। इस पानी के बहाव के अधिक होने से मोरों के जीर्ण रास्ते टूट जाने से किसानों के खेतों में पानी घुस गया, जिसके चलते फसलों को नुकसान होने की आंशका बनी हुई है।
महमदपुरा गांव के किसान रतनलाल शर्मा, निर्भय जाटव ने बताया कि बांध बारैठा का पानी पिछले महीने भर से किसानों को खेती के लिए छोड़ा जा रहा है। लेकिन अधिक मात्रा में पानी के तेज बहाव से सैकड़ों सालों से पानी निकास के लिए बनाए गए मोरो के टूट जाने से पानी खेतों में भर गया। किसानों की सूचना पर पहुंचे जलसंसाधान विभाग के अधिकारियों ने सीमेन्ट के कट्टे डलवाकर इस पानी को रोकने का प्रयास किया है। लेनिक मोरो (आउटलाइट) में आए कटाव का पानी तेज होने से खडी फसलों में पानी भर गया है। जिससे सरसों की फसल खराब होने की आंशका बनी हुई है।इसी प्रकार नगला बंजारा एवं कोठीखेडा गांव के किसान सोनवीर सिंह जाट ने बताया कि बांध के पानी के खेतों में भर जाने से उनकी 40 बीघा सरसों की खडी फसल के खराब होने की आंशका है। बारैठा बांध का पानी पुरावाईखेडा गांव होते हुए उनके गांव नगला बंजारा-कोठीखेडा में पहुंच रहा है। इस नुकसान को लेकर पीडि़त सोनवीरसिंह ने जिला कलक्टर से लेकर जलसंसाधान विभाग के अधिकारियों से पानी से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाव की मांग की है।
किसानों की मांगकिसानों की मांग है कि बांध से निकलने वाली नहरों के माध्यम से दिए जाने वाले पानी को गांवों तक पहुंचाने वाले मोरो की लम्बे समय से मरम्मत नहीं होने से उनके जगह-जगह कटाव से नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इधर जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पानी की पाइप बंद करने से खेतों में पानी घुसा था। जिसे नहर बंधकराकर समस्या का समाधान कर दिया है। अब कोई परेशानी नहीं है।
इनका कहना
पुरावाईखेडा की नहर निकल रही है। वह आउटलाइट नहीं है। डिस्ट्रीबूटर है। कैनाल नं01 में से पुरावाईखेडा ब्रांच निकल रही है, इसके पाइप को बंद कर दिया था। अब उसको बंद करा दिया है, किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है। अब पानी की मात्रा भी कम कर दी है।
-बनयसिंह, एक्सईएन, जलसंसाधन विभाग, भरतपुर
Published on:
20 Dec 2023 11:42 pm
