
कौन बनेगा मुकद्दर का सिकंदर, चौपालों पर गणित
भरतपुर. जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य पद के प्रत्याशियों का भाग्य मतदान के बाद ईवीएम में बंद हो गया। इनकी किस्मत का पिटारा चार सितम्बर को मतगणना के दौरान खुलेगा। बुधवार को मतदान के बाद गुरुवार को दिनभर चौपालों पर जीत का गणित लगता नजर आ रहा। खास तौर से 'कौन बनेगा मुकद्दर का सिकंदर जैसी चर्चाओं से चौपाल आबाद रहीं। कहीं मतदान के प्रतिशत से जीत का गणित लगा तो कहीं प्रत्याशी की लहर से जीत के दावे जताए गए।
प्रत्याशी भी इस गणित में उलझे रहे कि उन्हें कहां से कितने मत मिले हैं। गांव-मोहल्ला और गलियों तक के वोटरों की गिनती भी उंगलियों पर गिनाई जाती रहीं। प्रत्याशियों के समर्थक भी गर्मागर्म बहस में उलझे नजर आए। कौन प्रत्याशी कहां से जीत रहा और उसे किस गांव से कितने वोट मिल रहे हैं, इसकी गणना जातिगत आंकड़ों से भी की गई है। चर्चाओं में कहीं सीट त्रिकोगीण संघर्ष में उलझी नजर आई तो कहीं मुकाबला कड़ा माना गया। किसी ने प्रत्याशी की लहर और प्रतिशत के लिहाज से जीत के दावे कर दिए। ऐसे में दिनभर गांवों में चर्चाओं का दौर चलता रहा। हालांकि अब प्रत्याशियों के साथ समर्थक भी बेसब्री से मतगणना वाले दिन का इंतजार कर रहे हैं।
प्रधानी को लेकर भी अटकलें शुरू
जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव का अंतिम चरण का मतदान होने के बाद अब प्रधानी और जिला प्रमुख पद को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। वार्डों में जीत के प्रति आश्वस्त दिख रहे प्रधान पद के दावेदारों ने दम दिखाना शुरू कर दिया है। इसके लिए वह नेताओं के दर पर पहुंचकर अपने लिए आशीर्वाद की गुहार लगा रहे हैं। इससे इतर संभावित दावेदारों के साथ बड़े नेताओं की नजर भी जिताऊ प्रत्याशियों पर टिकी है। अपने दल का जिलाप्रमुख और प्रधान बनाने के लिए नेता गणित बिठाने में जुट गए हैं। ऐसे में संभावित जिताऊ प्रत्याशियों से संपर्क साध लिया गया है। कई जिताऊ प्रत्याशियों को तो पार्टी नेताओं ने अपने खेमे में बुला भी लिया है, जिससे अंत समय में वह अपने प्रत्याशी के लिए मतदान करा सकें। प्रधान और जिलाप्रमुख पद के संभावित दावेदार प्रदेश की राजधानी तक गोटी बिठाते नजर आ रहे हैं।
भाजपा में गुटबाजी, कांग्रेस में प्रधानी पर ध्यान
भले ही कांग्रेस की ओर से जिला प्रमुख पद के लिए संभावित प्रत्याशियों को चयन किया जा चुका है, लेकिन कांग्रेस के ज्यादातर विधायकों का ध्यान प्रधानी पर है, क्योंकि कामां, वैर, नदबई विधायक के अपने ही परिजन चुनाव लड़ रहे हैं। ज्यादातर विधायक अपनों के ही चुनाव में व्यस्त रहे हैं। एक विधायक तो पूरे चुनाव में ही कहीं नजर नहीं आए हैं। इधर, भाजपा की बात करें तो जिला प्रमुख चुनाव को लेकर यहां भी दो गुट सक्रिय हो चुके हैं। एक गुट जहां जिताऊ प्रत्याशियों को खुद अपने यहां रोकने में जुटा है तो दूसरा गुट बाड़ेबंदी में प्रवेश कराने की कोशिश में है। कांग्रेस का मानना है कि भाजपा की गुटबाजी का फायदा उन्हें मिल सकता है।
Published on:
03 Sept 2021 02:44 pm
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