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21 गांव के 881 किसान दे रहे आंदोलन की चेतावनी, गैस पाइप लाइन के लिए जबरन जमीन खोद रही कंपनी… मुआवजा भी नहीं

Farmers Movement In Bhilai : जिले के 21 गांवों के 881 किसानों के खेतों में निजी कंपनी की गैस पाइप लाइन बिछाई जा रही है।

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Farmers Movement In Bhilai : जिले के 21 गांवों के 881 किसानों के खेतों में निजी कंपनी की गैस पाइप लाइन बिछाई जा रही है। इसके लिए किसानों की जमीन चिन्हित की गई है। पाइप लाइन बिछाने वाली कंपनी ने न तो किसानों से अनुमति ली है न कोई मुआवजा दे रही है। सीधे खेतों में खुदाई कर पाइप लाइन बिछा रही है। इससे किसान बेहद नाराज हैं। नाराज किसानों ने 6 मार्च को जिला मुख्यालय में प्रदर्शन का ऐलान किया है। इसके बाद आंदोलन का विस्तार करेंगे।

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किसानों का कहना है कि मुताबिक गैस पाइप लाइन के एवज में तीन साल की फसल क्षति के बराबर मुआवजे का प्रावाधन है। लेकिन कंपनी किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है। नागपुर और झारसुगुड़ा के बीच निजी कंपनी की गैस पाइप लाइन प्रस्तावित है। यह पाइप लाइन जिले के दुर्ग व धमधा ब्लॉक के 21 गांवों के 881 किसानों के खेतों से होकर गुजरेगी। इनमें टेमरी, रौता, खर्रा, हिर्री, परसदा, नवागांव, पथरिया, डोमा, अहेरी, बागडूमर, बानबरद, ढौर, हींगनडीह, अछोटी, गोढ़ी, ढौर, लहंगा, मलपूरीकला, अंजोरा, ननकट्टी, बोड़ेगांव, रवेलीडीह आदि गांव शामिल है।

आपत्ति पर दो किमी बाद रोका काम

किसान करीब छह महीने से इसका विरोध कर रहे हैं, इसके बाद भी कंपनी के कर्मचारियों ने पिछले दिनों रवेली व बोड़ेगांव के आसपास किसानों को बिना कोई सूचना दिए खेतों को रौंदकर व बाउंड्रीवॉल तोड़कर करीब दो किमी पाइप लाइन बिछा दी। हालांकि किसानों के विरोध के बाद कर्मी लौट गए, लेकिन अब किसानों पर दोबारा पाइप लाइन बिछाने दबाव बनाया जा रहा है।

शिकायत का फायदा नहीं, इसलिए आंदोलन

किसानों ने बताया कि लगातार खेतों में पाइप लाइन का विरोध किया जा रहा है। इसकी शिकायत कलेक्टर से भी की जा चुकी है, लेकिन इस पर कोई भी फैसला अब तक नहीं हो पाया है। इधर कंपनी द्वारा नवागांव में किसी उपयोग के लिए निर्माण की तैयारी की जा रही है। किसान इससे आहत हैं। पिछले दिनों आंदोलन की चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन अफसरों ने इस पर भी ध्यान नहीं दिया।

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खुदाई के बाद खेती संभव नहीं

पाइप लाइन के लिए खेतों में 10 बाई 4 का गड्ढा खोदा जा रहा है। इसके नीचे पाइप डालकर दबाया जा रहा है। उक्त हिस्से में कम से कम 3 साल फसल संभव नहीं है। ऐसे में 3 साल की फसल क्षति के बराबर मुआवजा का प्रावधान है। किसी भी किसान को मुआवजा नहीं दिया गया है।

संपत्तियों को नुकसान का खतरा

कई किसानों ने प्रस्तावित स्थल पर गेहूं आदि फसल लगा रखी है। पाइप लाइन की खुदाई से यह फसल खराब हो रही है। वहीं कई किसानों की खेतों के मेड़, फेंसिंग, ट्यूबवेल, कीमती पेड़, मकान आदि प्रभावित हो रहे हैं। इसके लिए अलग से कोई भी मुआवजा का प्रावधान नहीं किया गया है।

दुर्घटना से नुकसान की आशंका

जिस जगह से होकर पाइप लाइन गुजर रही है, वहां किसान 3 साल फसल नहीं ले पाएंगे। वहीं भविष्य में भी इस जगह का दूसरा उपयोग नहीं कर पाएंगे। ऐसा किए जाने से दुर्घटना अथवा जान-माल के नुकसान की आशंका रहेगी। पाइप लाइन में खराबी से भविष्य में भी किसानों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।

निजी कंपनी के उपयोग के लिए शासन-प्रशासन की मदद से किसानों पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नियमानुसार किसी भी किसान को मुआवजा नहीं दिया गया है। ऐसे में किसान एकजुट होकर विरोध कर रहे हैं। अब आंदोलन कर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा

रविप्रकाश ताम्रकार संयोजक, संभागीय संयुक्त किसान मोर्चा

किसानों ने जरूर शिकायत की है, लेकिन यह अनिवार्य भू-अर्जन है। वेल इंडिया पाइप बिछा रही है। किसानों का मुआवजा तैयार है। किसानों को सहमति पत्र के साथ बैंक संबंधित दास्तावेज देना है, ताकि मुआवजा दिया जा सके।

- मुकेश रावटे एसडीएम दुर्ग