
पिता खुश हैं कि अंकिता खानदान में पहली है जो आईपीएस चुनी गई। खुशियों से छलकी उनकी आंखें और चेहरे पर मुस्कान के साथ वे सिर्फ इतना ही कह पाए कि बेटी का पिता होने पर मुझे गर्व है। चीर दे हिमालयों की चोटी, गंगा की वो धार बन, कर दे खाक राह की आड़ को, तू कर अपनी ज्वाला ऐसी बुलंद।
कभी तेज कभी मध्यम हो सरल, चाहे जो हो तेरी रफ्तार बढ़ता चल.. कविता की यह चंद पंक्तियों को सुनाकर दुर्ग की बेटी अंकिता शर्मा ने यूपीएससी में बाजी मार ली। इसका श्रेय उन्होंने अपने पति को दिया जो स्टार प्लस के मशहूर नाटक दीया और बाती के आईपीएस संध्या राठी के पति सूरज की तरह अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उन्हें मंजिल तक पहुंचने का हौसला दिया।
पढ़ाई और गृहस्थी बड़ा चैलेंज
दो साल पहले अंकिता की शादी कैप्टन विवेकानंद शुक्ला से हुर्ई। पढ़ाई और गृहस्थी संभालना आसान नहीं था। पति की ट्रांसफर वाली जॉब के बीच कई बार पढ़ाई के लिए वक्त भी नहीं मिलता तो वह मायके दुर्ग आ जाती। वह बताती है कि बीकॉम और फाइनेंस में एमबीए के बाद उसने यूपीएससी के लिए लोक प्रशासन विषय को चुना था।
इंटरव्यू में पूछा - कैसे करोगी मैनेज
अंकिता को इंटरव्यू में पैनल ने प्रश्नों की शुरुआत तो नक्सलवाद से की पर उसका साक्षात्कार कविता पर जाकर खत्म हुआ। आईपीएस बनने के बाद गृहस्थी को कैसे करोगी मैनेज? जैसे प्रश्नों के उत्तर अंकिता ने फर्राटे से दिए। आखिर में जब उसकी हॉबी पूछी गई तो उसने कविता लिखना बताया। बस क्या था इंटरव्यू पैनल ने कविता सुनाने कह दिया।
गोल्ड मेडलिस्ट है
अंकिता के पिता राकेश शर्मा ने बताया कि वह शुरू से ही मेघावी छात्रा रही। सेंट जेवियर स्कूल में गोल्ड मेडलिस्ट रहकर सेंट थामस कॉलेज से उसने बीकॉम की परीक्षा में गोल्ड मेडल लिया। एमबीए की पढ़ाई उसने श्रीशंकराचार्य कॉलेज जुनवानी से की और वहां भी गोल्ड मेडल हासिल किया। दो बेटियां और है वे चाहते हैं कि वे भी दोनों अपनी बड़ी बहन की राह पर चलें।
Published on:
28 Apr 2018 11:39 am
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