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पटवारी हल्का नंबर का गलत उल्लेख किया बैंक देगा ११ किसानों को १.६८ लाख हर्जाना

माह के अंतिम दिन बुधवार को फोरम की अध्यक्ष मैत्रेयी माथुर,सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने उतई क्षेत्र के ११ किसानों के परिवाद पर फैसला सुनाया
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भिलाई

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Dakshi Sahu

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Updated: 1 Mar 2018, 9:13 AM IST

Forum

दुर्ग . जिला उपभोक्ता फोरम ने फरवरी २०१८ में १०५ प्रकरणों पर फैसला सुनाकर एक रिकार्डबनाया है। माह के अंतिम दिन बुधवार को फोरम की अध्यक्ष मैत्रेयी माथुर,सदस्य राजेन्द्र पाध्ये व लता चंद्राकर ने उतई क्षेत्र के ११ किसानों के परिवाद पर फैसला सुनाया। फैसले में वहत्ताकार सहकारी समिति मर्यादित उतई और जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के मुख्य कार्यापलन अधिकारी को सेवा में कमी का दोषी ठहारया। फोरम ने आदेश दिया है कि दोनों को संयुक्त रुप से १६८४५६ रुपए एक माह के भीतर परिवादी किसानों को अदा करें। इस राशि में ५८४५६ बीमा का, ५५ हजार मानसिक कष्ट और ५५ हजार रुपए वाद व्यय का शामिल है।

खरीफ व रबी फसल का बीमा कराया था
परिवाद के मुताबिक शासन ने वर्ष२०१५-१६ के खरीफ व रबी फसल के लिए बीमा किया था। प्रीमियम राशि प्रत्येक किसान क्रेडिट कार्डधारी कृषकों से लिया गया था। सेवा सहकारी समिति से प्रीमियम राशि जिला सहकारी केन्द्री बैंक के माध्यम से भारतीय कृषि बीमा कंपनी के खाते में स्थानंतरण किया गया था। खास बात यह है कि प्रीमियम जमा होने के बाद ११ किसानों को फसल क्षति होने के बाद दावा करने पर बीमा का लाभ नहीं मिला। किसानों ने बीमा का लाभ लेने पहले अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजा। किसी तरह की सुनवाई नहीं होने पर परिवाद प्रस्तुत किया गया था।

28 दिन में 105 प्रकरणों पर फैसला
जिला उपभोक्ता फोरम ने एक माह में ही १०० से अधिक प्रकरणों पर फैसला देकर तीसरी बार रिकार्ड बनाया है। इसके पहले वर्ष२०१६ के जनवरी व फरवरी में १०२ प्रकरण और वर्ष २०१७ मार्च में १०० प्रकरणों पर फैसला सुनाया था। वर्ष २०१८ में २८ दिनों वाले फरवरी में १०५ प्रकरणों पर फैसला सुनाया। इसमें फसल बीमा के ३४, हाउसिंग बोर्ड के ९, शिक्षा के १, बैंक से संबंधित ७, जनरल इंश्योरेंस के १६ और अन्य ३८ प्रकरण शामिल है।

बैंक ने यह की थी गलती
शासन ने फसल क्षति देने सर्वे कराया था। सर्वे के आधार पर पटवारी हल्का नंबर ४० पुरई के किसानों का लाभ मिलना था। परिवादी किसानों का खेत भी इसी पटवारी हल्के नबंर में है, लेकिन बैंक ने प्रीमियम जमा करते समय किसानों का पटवारी हल्का नंबर ४२ उतई का उल्लेख कर दिया था। इस वजह से किसानों का लाभ नहीं मिला।

फोरम का निष्कर्ष
जब शासन प्रत्येक ऋणी किसानों का फसल बीमा करता है तो किसानों का इसका अनिवार्य रुप से लाभ मिलना चाहिए। किसान बीमा का बाद यह सोचता है कि अगर फसल खराब हो गया तो उसे बीमा का लाभ मिलेगा। बैंक की गलती के कारण किसानों को इसका लाभ नहीं मिला।

पटवारी हल्का नंबर निवास का दिया
अधिवक्ता आदित्य ताम्रकार ने बताया कि हमने फोरम में तर्क प्रस्तुत किया था कि फसल बीमा खेत में लगे फसल का किया जाता है। किसानों का खेत पटवारी हल्का नंबर ४० पुरई में है। पटवारी हल्का नंबर ४२ निवास का है। बैंक ने प्रीमियम फसल बीमा का लिया है और पटवारी हल्का नंबर निवास का दिया है। इस तर्क को फोरम ने स्वीकार किया।