भिलाई. नवीन प्राण में बसंत, मोर वीणा ओठे कोन सुरे बाजे दोखीन हावा जागो-जागो.. जैसे बसंत के गीतों पर होली के रंग के साथ बदलती ऋतुएं। गीत वितान कला केन्द्र के बसंत उत्सव में मंच पर शांति निकेतन सा माहौल बन गया। शांति निकेतन से आए बाउल कलाकार दुलाल दास और उनके साथियों ने कविगुरू के लिखे बाऊल गीतों को सुरो में ढाला। नृत्यधाम की नृत्यांगनाओं ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में गीत वितान संस्था की ओर से कलाकारों का भी सम्मान किया गया। जिसमें शांति निकेतन से आए कलाकार दुलाल दास एवं उनके साथी, नृत्यगुरु राखी राय शामिल थे।
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