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बिना लेबर लाइसेंस दे दिया शहर की सफाई का ठेका, सहायक श्रमायुक्त ने भिलाई निगम को पत्र लिखकर कहा भुगतान रोको

नगर निगम भिलाई ने गाजियाबाद की एजेंसी नेचर ग्रीन टूल्स एंड मेकेनिकल प्राइवेट लिमिटेड को सालाना लगभग 23 करोड़ 21 लाख 52 हजार रुपए शहर की सफाई का ठेका दिया है।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Aug 26, 2021

भिलाई. सहायक श्रमायुक्त ने नगर निगम भिलाई को बिना लेबर लाइसेंस लिए दस महीने से शहर की सफाई कर रही एजेंसी नेचर ग्रीन टूल्स एंड मैकेनिकल प्राइवेट लिमिटेड का भुगतान रोकने कहा है। इसके बाद निगम ने जब तकलेबर लाइसेंस जारी नहीं हो जाता, किसी भी प्रकार के बिल भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसका असर अब कामगारों के मेहनताना पर भी पड़ सकता है। निगम प्रशासन पटरी पार के सभी वार्डों की सफाई के एवज में एजेंसी को हर महीने 1 करोड़ 93 लाख रुपए भुगतान करता है। नगर निगम भिलाई ने गाजियाबाद की एजेंसी नेचर ग्रीन टूल्स एंड मेकेनिकल प्राइवेट लिमिटेड को सालाना लगभग 23 करोड़ 21 लाख 52 हजार रुपए शहर की सफाई का ठेका दिया है।

निगम प्रशासन ने थमाया नोटिस
एजेंसी ने 1300 सफाई कामगारों, सुपरवाइजर व अन्य सहयोग स्टाफ के साथ 1 नवंबर 2020 से काम शुरू किया। 31 अक्टूबर 2021 को ठेका समाप्त भी हो जाएगा, लेकिन अभी तक लेबर लाइसेंस नहीं लिया है। 19 अगस्त को पत्रिका में खुलासा के बाद सहायक श्रमायुक्त आरके प्रधान ने निगम आयुक्त को चि_ी लिखकर एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करने कहा। तब निगम प्रशासन ने आनन-फानन में नोटिस थमाया। इसके बाद एजेंसी ने भी तत्काल अपना स्पष्टीकरण दे दिया था। एजेंसी ने अपने जवाब में लेबर लाइसेंस के लिए निर्धारित शुल्क जमा करने और प्रक्रिया जारी रहने की बात कही थी। श्रम सुविधा पोर्टल में तकनीकी दिक्कतें और लाइसेंस की एवज में जमा शुल्क को लेकर कुछ भ्रम को वजह बताया था। अब सहायक श्रमायुक्त ने दोबारा नोटिस जारी कर भुगतान रोकने कहा है।

19 फरवरी को कर दिया था आवेदन
नेचर ग्रीन टूल्स एंड मैकेनिकल प्राइवेट लिमिटेड के स्थानीय प्रबंधक रूपभ श्रीवास्तव ने अपनी सफाई में कहा है कि नगर निगम से फॉर्म-5 मिलने के बाद लेबर लाइसेंस लेने की प्रकिया शुरू की। श्रम विभाग के दफ्तर में संपर्क करने पर बताया गया कि मैनुअली नहीं हो पाएगा। श्रम सुविधा पोर्टल के जरिए एप्लाई करना होगा। इसके बाद 19 फरवरी को श्रम सुविधा पोर्टल में ऑनलाइन एप्लाई किया। इस दौरान जानकारी में चूक हो जाने की वजह से प्रति कामगार 1000 रुपए की जगह 100 रुपए की दर से 1300 कर्मियों का शुल्क जमा किया। इसकी वजह से पोर्टल में प्रक्रिया अटक गई। इस दरमियान कोरोना की दूसरी लहर आ गई। हमेशा फील्ड में रहने की वजह से एजेंसी के कई जिम्मेदार भी चपेट मेंं आ गए और प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। स्थिति सामान्य होने के बाद त्रुटि में सुधार करते हुए प्रति कर्मी 1000 रुपए जमा किए और प्रक्रिया अब लगभग पूरी हो चुकी है।

चूक जरूर हुई है, मगर हमारी नीयत में खोट कतई नहीं
रूपभ श्रीवास्तव ने अपने जवाब में कहा है कि शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने या अनुचित फायदा उठाने की उनकी नीयत कभी नहीं रही, हां पहले जानकारी के अभाव में और बाद में तकनीकी त्रुटि के कारण लेबर लाइसेंस लेने में देरी जरूर हो गई। उन्होंने यह भी दावा किया है कि निगम में पहली सफाई ठेका कंपनी है जो कामगारों को निर्धारित पूरा वेतन और हर महीने समय पर भुगतान करती रही है। सभी कामगारों का पीएफ और ईएसआई भी अद्यतन है। आर्थिक मामलों को लेकर किसी तरह की कोई शिकायत नहीं है।

कामगारों को नहीं हो सकेगा समय पर वेतन भुगतान
एजेंसी दावा करती रही है कि अब तक उसके दस महीने के कार्यकाल में कभी भी सफाई कामगारों को वेतन के लिए आंदोलन नहीं करना पड़ा, जैसा कि इससे पहले होता रहा है। हर महीने की शुरुआत में तय तारीख पर कर्मियों को उनका पूरा निर्धारित वेतन भुगतान हो जाता है। भविष्य निधि और कर्मचारी बीमा निगम का किश्त भी समय पर जमा हो रहा है। अब अगर एजेंसी को भुगतान नहीं होता है तो इसका खमियाजा कामगारों को भुगतना पड़ेगा। सितंबर में उनके वेतन पर संकट खड़ा हो सकता है। सहायक श्रमायुक्त दुर्ग आरके प्रधान ने बताया कि नगर निगम भिलाई में सफाई का ठेका लेने वाली नेचर ग्रीन टूल्स एंड मैकेनिकल प्राइवेट लिमिटेड ने अभी तक लेबर लाइसेंस नहीं लिया है। निगम प्रशासन को उसका भुगतान रोकने पत्र लिखा है। लाइसेंस के लिए निर्धारित शुल्क कभी भी जमा की जा सकती है।