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Video: यहां 15 रुपए में होता है बाघों की जान से खिलवाड़, इनकी हरकत देखकर आप ही पहचानिए, असली जानवर कौन..

रायल बंगाल टाइगर को परेशान करने के बाद वे सफेद बाघ के केज में चले गए। वहां भी यही हरकत करते रहे मगर इन्हेें किसी ने न रोका न टोका।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 17, 2017

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भिलाई. यह तस्वीर है मैत्रीबाग के जू की। कुछ मनचले युवक रायल बंगाल टाइगर और व्हाइट टाइगर को तंग कर रहे हैं। वे मिनट-दो मिनट नहीं बल्कि पूरे पंद्रह मिनट बाघों की जान से खेलते रहे जब तक कि वह गुस्सा होकर गुर्राया नहीं। रायल बंगाल टाइगर को परेशान करने के बाद वे सफेद बाघ के केज में चले गए। वहां भी यही हरकत करते रहे मगर इन्हेें किसी ने न रोका न टोका। इनकी सारी हरकतें फोटो जर्नलिस्ट गौकरण निषाद ने अपने कैमरे में कैद की।

चिडिय़ाघर का नियम
चिडिय़ाघर और उसके परिसर में जानवरों को चिढ़ाना, खाना देना या तंग करना दंडनीय अपराध है। पीसीए के तहत ऐसा करने वाले को तीन साल की सजा, 25 हजार रुपए का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। किसी भी जंगली जानवर को पकडऩा, फंसाना, जहर देना या लालच देना दंडनीय अपराध है। इसके दोषी को सात साल की सजा या 25 हजार रुपए का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

21 जवानों का पहरा
मैत्रीबाग के इंचार्ज डॉ. जीके दुबे दावा करते हैं कि पूरा बाग व जू में 21 सुरक्षा जवानों का पहरा रहता है। सबसे पहले जू के गेट पर ही जवान लोगों पर नजर रखता कि कहीं वे वन्य प्राणियों को नुकसान पहुंचाने वाली कोई चीज हाथ में तो नहीं रखा है। इसके अलावा हिरण, टाइगर और भालू के केज के पास विशेष रूप से जवान तैनात किए गए हैं। इनके अलावा जू मेंं काम करने वाले पीआरब्ल्यू वर्कर भी निगरानी करते रहते हैं।

प्रबंधन कितना गंभीर आप भी जानिए-
जू में वन्य प्राणियों से छेड़छाड़ रोज की बात है, लेकिन प्रबंधन खुद उदासीन है। प्रबंधन ने नौ साल पहले वर्ष 2008 में हिरण के केज में घुंसकर उन्हें परेशान करने वाले कुछ युवकों के खिलाफ थाने में अपराधिक प्रकरण दर्ज करवाया था।

चेतावनी बोर्ड लगाए हैं नहीं मानते तो क्या करें
डॉ. दुबे कहते है कि मैत्रीबाग के प्रवेश द्वार पर जहां हमें अगवानी का बोर्ड लगाना चाहिए, चेतावनी बोर्ड लगाना पड़ा है। इसके अलावा जू में और भी कई स्थानों पर वार्निंग बोर्ड लगाए गए हैं। इसके बाद भी लोगों की हरकतें समझ से परे है।

भारत सरकार ने सन् 1972 में भारतीय वन्य जीव संरक्षण अधिनियम इस उद्देश्य से पारित किया था कि वन्यजीवों के अवैध शिकार तथा उसके हाड़-मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाई जा सके। इसे सन् 2003 में संशोधित किया गया है और इसका नाम भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 रखा गया।

जिसके तहत इसमें दण्ड तथा जुर्माना और कठोर कर दिया गया है। अब कम से कम कारावास 3 साल का है जो कि 7 साल की अवधि के लिए बढ़ाया भी जा सकता है और कम से कम जुर्माना रु 10,000 रुपए है। दूसरी बार अपराध करने पर कारावास और कम से कम जुर्माना 25,000 रुपए है।

हर नागरिक का कर्तव्य
भारतीय संविधान के अनुच्छे 51(ए) के मुताबिक हर जीवित प्राणी के प्रति सहानुभूति रखना भारत के हर नागरिक का मूल कर्तव्य है। भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 के मुताबिक किसी पशु को मारना या अपंग करना, भले ही वह आवारा क्यों न हो, दंडनीय अपराध।