
भिलाई. साढ़े आठ सौ किलो चावल, 4०० किलो की दाल, 6 हजार लीटर पानी के साथ 1 हजार किलो सब्जियां और करीब 8 सौ किलो से ज्यादा के मसालों से बनी खिचड़ी हमारे शहर में हर शनिवार को पकती है। जी हां यह खिचड़ी बनती है अक्षयपात्र के किचन में जिसे भिलाई शहर के सरकारी स्कूलों के 32 हजार बच्चे बड़े ही चाव से खाते हैं।
इंटरनेशनल फूड फेस्टिवल में इन दिनों 'खिचड़ीÓ ने सबका ध्यान खींचा है। हमारे यहां घर-घर में बनाई जाने वाली लजीज और पौष्टिक खिचड़ी को नेशनल फूड का दर्जा मिलने जा रहा है। हमारे छत्तीसगढ़ में खिचड़ी ना सिर्फ एक सुपाच्य भोजन है बल्कि आस्था की प्रतीक भी है। भिलाई में एक दर्जन से ज्यादा समाजों में खिचड़ी परोसने का रिवाज है।
अक्षयपात्र के प्रेमविलास बताते हैं कि शनिवार को ही सेंटर किचन में 9 हजार 5 किलो खिचड़ी तैयार की जाती है। जो 6 सौ और 12 सौ लीटर के कूकर में एक साथ पकाई जाती है। अक्षयपात्र की रसोई में साढ़े 9 हजार किलो खिचड़ी पकने में ढाई से तीन घंटे का समय लगता है। इनती मात्रा में खिचड़ी तैयार करने 850 किलो चावल, 4 सौ किलो दाल, 6हजार लीटर पानी डलता है।
2 सौ किलो बैगन, 2 सौ किलो लौकी, 2 सौ किलो कद्दू, 2 सौ किलो आलू, 2 सौ किलो गोभी मिलाई जाती है। इस खिचड़ी का स्वाद बढ़ाने 60 किलो धनिया पाउडर, 10 किलो मिर्ची पाउडर, 5 किलो हींग, 20 किलो हल्दी, 2 सौ लीटर तेल, 20 किलो जीरा, 8 किलो खड़ी मिर्च, 22 किलो गरम मसाला, 50 किलो अदरक, 100 किलो हरी मिर्च, 4 किलो तेजपत्ता और 2 सौ किलो धनिया पत्ती मिलाया जाता है और इसके बाद तैयार होती है स्वादिष्ट और पौष्टिक मिक्स खिचड़ी।
यहां गोवर्धन पूजा के दिन गाय-बैलों की पूजा कर उन्हें भी खिचड़ी खिलाने का रिवाज है। हालांकि इसे गरीबों का भोजन माना जाता है,पर अब यह होटलों के मैन्यू में भी शामिल हो गया है। खाने में हल्की और सादी खिचड़ी अब होटल के मैन्यू में भी शामिल हो चुकी है। शहर के कई होटल हैं जहां खिचड़ी का आर्डर भी लोग चाव से देते हैं।
Published on:
04 Nov 2017 11:43 am
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