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ठगों को पकडऩे फिल्मी स्टाइल में CG पुलिस ने दिल्ली में बिछाया जाल, ढाबे में कुक बने SI, जवानों ने बांटा पंपलेट

घर की छत पर निजी दूरसंचार कंपनी का मोबाइल टावर लगावकर हर महीने किराए के रूप में मोटी रकम दिलवाने का झांसा देकर खुर्सीपार निवासी मनोरमा जैन (80 वर्ष) से 62 लाख रुपए ठगी के सात आरोपी पकड़ लिए गए हैंं। (Bhilai crime news)

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 18, 2019

ठगों को पकडऩे फिल्मी स्टाइल में CG पुलिस ने दिल्ली में बिछाया जाल, ढाबे में कुक बने SI, जवानों ने बांटा पंपलेट

ठगों को पकडऩे फिल्मी स्टाइल में CG पुलिस ने दिल्ली में बिछाया जाल, ढाबे में कुक बने SI, जवानों ने बांटा पंपलेट

भिलाई. घर की छत पर निजी दूरसंचार कंपनी का मोबाइल टावर (Mobile tower) लगावकर हर महीने किराए के रूप में मोटी रकम दिलवाने का झांसा देकर खुर्सीपार निवासी मनोरमा जैन (80 वर्ष) से 62 लाख रुपए ठगी (Thugi in Bhilai) के सात आरोपी पकड़ लिए गए हैंं। आरोपियों को पकडऩे जिले की पुलिस (Bhilai Police)की दो टीम 20 दिन तक नोएडा और दिल्ली में कैंप लगाकर डटी रही। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने पहले जिन खातों में रकम जमा करवाई थी उसका विवरण निकलवाया। इसके बाद मोबाइल नंबर व फोन पर हुई बातचीत के लोकेशन के आधार पर ठगों तक पहुंची। पुलिस ने आरोपियों को यहां दुर्ग कोर्ट में पेश किया। सभी को न्याायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। एक आरोपी पहले ही पकड़ा जा चुका है। आठ अन्य आरोपी फरार है। यह गिरोह हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड में भी सक्रिय था। करीब आठ करोड़ की ठगी ये कर चुके हैं। मंगलवार को पत्रवार्ता में एससपी अजय यादव ने इसका खुलासा किया। इस दौरान एएसपी रोहित झा, सीएसपी विश्वास चंद्राकर और डीएसपी प्रवीरचंद तिवारी, टीआई खुर्सीपार सुरेंद्र उके मौजूद थे।

ये आरोपी पकड़े गए
नोएडा निवासी अपूर्व गुप्ता (29 वर्ष), उत्तर प्रदेश गाजियाबाद के मंजेश कुमार चौहान (31वर्ष), दिल्ली जामिया नगर के सैयद मोहम्मद फैज, दिल्ली अशोक नगर के ज्ञासुद्दीन (25 वर्ष), गाजियाबाद के कुंदन कुमार (24 वर्ष),नोएडा गौतम बुद्ध नगर के सोनू पांडेय (23 वर्ष) और अनुज वर्मा (21 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। ये सभी अपना नाम बदलकर फोन करते थे। एक आरोपी रंजीत सिंह पहले ही लखनऊ से गिरफ्तार हो चुका है। वह दुर्ग जेल में बंद है।

नोएडा में खोली थी कंपनी
एसएसपी यादव ने बताया कि आदिल परवेज, मुस्तकीन और सैयद मोहम्मद फैज नोएडा के सेक्टर-10 में ग्लोबल फिन केयर कंपनी खोलकर रखा था। अपूर्व गुप्ता, मंजेश चौहान, अभिषेक सिन्हा मोबाइल टावर लगवाने, लोन दिलाने, और बीमा पॉलिसी का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।

ठगों को करवाता था मोबाइल नंबर उपलब्ध
मुंबई निवासी विपिन ठगों को लोगों का मोबाइल नंबर उपलब्ध करवाता था। एवज में प्रति नंबर 2 रुपए लेता था। ऐसे 5 हजार नंबर उपलब्ध कराया था। कंपनी में करीब 50 लड़के-लड़कियां काम करते थे। उन्हें मोबाइल पर कॉल करने की ट्रेनिंग दी जाती थी। बोलने के लिए कॉपी में मोबाइल नम्बर और स्लोगन लिखकर दिया जाता था। जो व्यक्ति उनकी बातों में आ जाता था, उस नंबर को गोलाकर कंपनी के डायरेक्टर्स को सौंप देते थे। इसके बाद उनसे विभिन्न प्रलोभन देकर झांसे में लेकर ठगी करते थे।

ऐसे पहुंची पुलिस मुख्य आरोपी तक
मुख्य ठग अपूर्व गुप्ता (कुणाल कपूर) को पकडऩे के लिए उप निरीक्षक राजेन्द्र सिंह कंवर को नोएडा के एक ढाबा में रसोइयां का काम तक करना पड़ा। पुलिस को पता लग गया था कि सामने के एटीएम में अपूर्व अक्सर पैसे निकालना आता है। इसके बाद ढाबे में खाना भी खाता है। अपूर्व एक दिन एटीएम में पैसा निकाला और चला गया। पुलिस ने उसकी पहचान कर ली। पुलिस को दफ्तर तक पहुंचना था इसलिए अपूर्व की रैकी करती रही। इस बीच अपूर्व अपनी पत्नी के साथ वैष्णव देवी दर्शन करने चला गया। उसके लौटने का इंतजार कर रही पुलिस दिल्ली स्टेशन में रैकी करती रही। इस टीम में एएसआई चंद्रशेखर सोनी, गोरखनाथ चौधरी, प्रधान आरक्षक संतोष मिश्रा, आरक्षक शहबाज खान, अमित दुबे, रिंकू सोनी, और सूरज पांडेय थे। अपूर्व 12 दिसम्बर को दिल्ली लौटा। फिर निजामुद्दीन गया। पुलिस उसका पीछे करते घर तक पहुंच गई। यहां भी पुलिस को पंपलेट बांटने वाले बनकर लगातार उसकी निगरानी करनी पड़ी।

साइबर टीम: हर खाते की डिटेल और पांच सौ मोबाइल नंबर का सीडीआर निकाला
एएसपी रोहित कुमार झा, डीएसपी क्राइम प्रवीरचंद तिवारी और टीआई गौरव तिवारी ने साइबर मोर्चा संभाला। ठगों ने जिस खाते में पैसे ट्रांसफर करवाए थे गौरव ने उसका पूरा डिटेल और करीब 500 मोबाइल नम्बर का सीडीआर निकाला। इससे कुणाल कपूर और अजय शर्मा के संबंध में जानकारी मिली। हेलमेट पहनकर ऐसे एटीएम से पैसा निकालने की जानकारी मिली जहां गार्ड नहीं होते थे। सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन किया। टीम में प्रधान आरक्षक चंद्रशेखर बंजीर, आरक्षक जावेद खान, आरती सिंह, निखली साहू, विजय शुक्ला, सुरेश चौबे, विक्रम यदु और दिनेश विश्वकर्मा की भूमिका रही।

लखनऊ से पकड़ाया रंजीत
ठगों ने रंजीत के खाते में पैसा जमा कराया था। एसआई सतीश पुरिया उसे पहले से ही लखनऊ से गिरफ्तार कर लाया है। वह अभी दुर्ग जेल में बंद है। सतीश की टीम में प्रधान आरक्षक राजेश सिंह, सगीर खान, अजय सिंह, आरक्षक पन्ने लाल, वीर नारायण और ईशांत प्रधान थे। रंजीत से मिले क्लू के आधार पर पुलिस ने फिर आगे कार्रवाई की।

फोन पर उलझाए रखा
साइबर टीआई गौरव तिवारी ने प्रार्थी की बेटी कविता जैन से अपूर्व के मोबाइल पर कॉल करने कहा। अपूर्व उससे डेढ़ लाख रुपए की मांग कर रहा था। कविता उसे बातों में उलझाए रखी। इधर राजेंद्र और उनकी टीम अपूर्व पर निगाह रखी हुई थी। जैसे ही फोन कट किया, उसे दबोच लिया। इसके बाद दफ्तर से बाकी आरोपी पकड़ मेें आ गए।