
BSP CEO ने कहा दुर्गापुर में जो 6 महीने में नहीं सीखा वो भिलाई में 6 दिन में सीखा, सुरक्षा की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय कंपनी के हाथ
भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र के सीईओ एके रथ ने कहा है कि संयंत्र में बार-बार हो रहे हादसे को देखते हुए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा सलाहकार कंपनी मेसर्स डू-पॉण्ट की मदद ली जाएगी। कंपनी के विशेषज्ञ संंयंत्र की सुरक्षा प्रणालियों व पद्धतियों की समीक्षा कर सुरक्षित कार्य करने मार्गदर्शन देंगे। मेसर्स डू-पॉण्ट वह कंपनी है, जिसने टाटा स्टील जैसे प्रतिष्ठानों को सुरक्षा संबंधी सेवाएं दी हैं। कंपनी बीएसपी के साथ काम करने तैयार है।
सीइओ का कार्यभार संभालने के बाद रथ पहली बार पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। संयंत्र में कर्मी सुरक्षित स्थिति में काम कर रहे हैं या नहीं इस बात को कार्मिक उच्च प्रबंधन की डर से छुपा सकते हैं। इस वजह से प्रबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा सलाहकार कंपनी की सेवाएं लेने का फैसला किया है। रथ ने कहा कि दुर्गापुर में जितना अनुभव 6 माह में मिला था, बीएसपी में उसे महज ६ दिनों में हासिल किया हूं।
सुरक्षा कार्य को खुद करेंगे लीड
उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा सलाहकार कंपनी कंसलटेंट के तौर पर संयंत्र में काम करना शुरू करेगी, तब इस कार्य को वे खुद लीड करेंगे। संयंत्र में सुरक्षा के बेस्ट प्रेक्टिसेस को अपनाना होगा। गैस हादसे के बाद एक-एक परिवार से वे निजी तौर पर घर-घर जाकर मिले हैं। सुरक्षा को लेकर उनके मन में जो बात हैं, उसे वे बता नहीं सकते। इस पर बोलने से बेहतर है, करके दिखाना।
कर्मियों से कहा-दें सुरक्षा पर सुझाव
बीएसपी में सुरक्षित काम किया जा सके, इसके लिए कर्मियों से सुझाव मांगा जा रहा है। सुझाव देने वाले कर्मियों के नाम को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। ७० से अधिक सुझाव आ चुके हैं। एक कर्मचारी ने एक स्थान पर दुर्घटना की आशंका जताई तो तीन लोगों की कमेटी बनाकर उक्त स्थान पर भेजा जा रहा है।
मिलकर सेफ्टी कमेटी बनाने करेंगे अपील
सेफ्टी कमेटी गठन करने के सवाल पर रथ ने कहा कि बीएसपी में जब तक प्रतिनिधि यूनियन का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक सभी यूनियन को मिलाकर सेफ्टी कमेटी का गठन किया जाए। यह मंशा प्रबंधन की है। इसके लिए सभी यूनियन से अपील भी की जाएगी। यूनियनें आपस में छोटे-बड़े का भेदभाव न करें।
अफसरों की लगाई विशेष ड्यूटी
गैस हादसे में झुलसे कर्मचारी सेक्टर-9 में दाखिल हैं, उनका सबसे बेहतर उपचार किया जा रहा है। एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों ने भी यह माना है। वर्तमान में झुलसे कर्मियों में २ की स्थिति क्रिटिकल है, शेष खतरे से बाहर हैं। रथ ने कहा कि गैस हादसा से सभी को एक गहरा आघात पहुंचाया है। पीडि़त परिवार को मिलने वाली सुविधा के लिए भटकना न पड़े। इसके लिए अफसरों की विशेष ड्यूटी लगा दी।
श्रद्धांजलि दी
इस मौके पर दो मिनट का मौन रखकर दुर्घटना में मृत कर्मवीरों को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) रीता बैनर्जी, निदेशक प्रभारी (चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवाएं) डॉक्टर केएन ठाकुर, कार्यपालक निदेशक (वित्त व लेखा) बीपी नायक, कार्यपालक निदेशक (परियोजनाएं) एके कबीसतपथी, महाप्रबंधक प्रभारी (कार्मिक व प्रशासन) अनुराग नागर, महाप्रबंधक (खदान) एके मिश्रा, महाप्रबंधक (कार्मिक)आरएन पंडा,उप महाप्रबंधक (जनसंपर्क) विजय मेराल, उप महाप्रबंधक (नगर सेवाएं) एके पति उपस्थित थे।
फैक्ट्री एक्ट में पंजीयन प्रबंधन नहीं, शासन का मामला है
सेल की दूसरी यूनिट एक फैक्ट्री के तौर पर पंजीकृत है। वहां दुर्घटना होने पर पीडि़त को आसानी से अनुकंपा समेत अन्य सुविधाएं मिल जाती है। बीएसपी में ४३ फैक्ट्री पंजीकृत है। यहां संयंत्र के भीतर की सड़क में दुर्घटना हो, तो पीडि़त परिवार को अनुकंपा के तहत नौकरी नहीं मिल पाती।
जवाब- बीएसपी को एक फैक्ट्री के दायरे में रखना है या अलग-अलग ४३ फैक्ट्री के तौर पर, यह फैसला राज्य सरकार करती है। यह मामला प्रबंधन का नहीं है।
अधिकारी जनरल शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं, ठीक करेंगे यह व्यवस्था
बीएसपी में डीजीएम व एजीएम स्तर के करीब 900 अधिकारी हैं। इनमें से 90 फीसदी जनरल शिफ्ट में ड्यूटी कर रहे हैं। रविवार को तो महज १४० अधिकारी ही ड्यूटी करते हैं। सभी का साप्ताहिक अवकाश रहता है। सुरक्षा का जिम्मा डीजीएम स्तर के अधिकारियों को दिए हैं। इन हालात में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था का दावा कैसे किया जा सकता है?
जवाब- इस सवाल पर उन्होंने महाप्रबंधक प्रभारी अनुराग नागर को नोट करने कहा। साथ-साथ उन्होंने व्यवस्था को ठीक करने की बात कही।
Updated on:
24 Oct 2018, 11:16 AM IST
Published on:
24 Oct 2018, 11:16 AM IST
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