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ठेकेदारों के दबाव में एचएससीएल के 6500 श्रमिक गए हड़ताल पर

भिलाई इस्पात संयंत्र में एचएससीएल के 6500 ठेका श्रमिक सोमवार व मंगलवार के आधे दिन काम पर नहीं गए। असल में वे हड़ताल में शामिल नहीं थे।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Jun 20, 2018

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ठेकेदारों के दबाव में एचएससीएल के 6500 श्रमिक गए हड़ताल पर

भिलाई . भिलाई इस्पात संयंत्र में एचएससीएल के 6500 ठेका श्रमिक सोमवार व मंगलवार के आधे दिन काम पर नहीं गए। असल में वे हड़ताल में शामिल नहीं थे। ठेकेदारों के दबाव में वे काम पर नहीं आ रहे थे। श्रमिकों को जब ठेकेदारों ने काम पर लौटने कहा, तो वे लौट गए।

एक्टू कार्यालय, सेक्टर-6 में हुई बैठक के दौरान महासचिव श्याम लाल साहू ने यह बात कही।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार व प्रबंधन की श्रमिक-विरोधी नीतियों के कारण ठेका श्रमिकों का लगातार शोषण हो रहा है। प्रबंधन श्रमिकों को न्यूनतम वेतन मिले, यह व्यवस्था करके भी नहीं दे रहा है। श्रमिकों के मेहनत की कमाई का बंदरबांट हो रहा है।

दिया जाता है सिर्फ २६ दिनों का वेतन
उन्होंने कहा कि एचएससीएल के ठेका श्रमिक हों या सुरक्षा कर्मचारी हर किसी से काम ३० दिन लेने के बाद २६ दिन का वेतन थमा दिया जाता है। इसके खिलाफ आवाज उठाने पर काम से बाहर करने की धमकी दे दी जाती है। पूरे मामले में प्रबंधन का रवैया सबसे अधिक लचर है। विभाग के अधिकारी अगर चाह लें, तो हर श्रमिक को मिनिमम वेज मिलने लगेगा।

नहीं मिलती वेतन पर्ची
एचएससीएल के श्रमिकों को ठेकेदार वेतन पर्ची दें, पीएफ पर्ची दें, महीने में जितने दिन काम करते हैं उसका पूरा वेतन दिया जाए। इसके साथ-साथसुरक्षा के उपकरण दिए जाएं।संयंत्र में प्रबंधन वठेकेदार मिलकर बरसों से ठेका श्रमिकों का शोषण कर रहे हैं, जिसकी घोर निंदा की जाती है।

बैठक में एचएससीएल ठेकेदारों की हड़ताल में ठेकेदारों के दबाव में आकर शामिल हुए लगभग साढ़े छ: हजार ठेका श्रमिकों के वेतन में किसी प्रकार की कटौती न किए जाने की मांग की गई।

नियमित कर्मियों का जल्द हो वेतन समझौता
केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से बीएसपी के नियमित कमियों का वेतन समझौता नहीं हो पा रहा है। पिछले छह दशक में यह पहली बार है, जब सरकार इस तरह का क्लॉज लेकर आ गई है कि कर्मियों का वेतन समझौता ही अटक गया है।

जल्द कराया जाए यूनियन चुनाव
यह सरकार की सोची समझी नीति है। इस मामले में सभी श्रमिक नेताओं को एक होकर केंद्र सरकार का विरोधकरना चाहिए।जिससे वे अर्फोडिबिटी क्लॉज को वापस ले। महासचिव ने जल्द से जल्द बीएसपी में यूनियन की मान्यता को लेकर चुनाव कराने की मांग की।जिससे श्रमिकों की मांगों को प्रबंधन तक लगातार पहुंचाया जा सके।

आवासों के मरम्मत पर प्रबंधन का नहीं ध्यान
बैठक में कहा गया कि बीएसपी के आवासों की मरम्मत का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। जिससे कर्मियों में नाराजगी है। बारिश में अब लोगों को परेशान होना पड़ेगा।इससे कर्मचारी ड्यूटी में रहते हुए परिवार की चिंता करते हैं। जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ता है।

प्रबंधन इस काम जल्द निपटाए, ताकि आवासों में लोग बिना चिंता के रह सकें।इस बैठक में अशोक मिरी, ए शेखर राव, आरपी गजेंद्र, प्रभाकर दाते, श्याम लाल साहू, बृजेंद्र तिवारी और देवानंद चौहान मौजूद थे।