
भिलाई. नगर निगम और जिला प्रशासन की टीम ने शनिवार को अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। अभियान की शुरुआत नगर निगम के वार्ड 16 कुरुद स्थित १०४ एकड़ सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माण से हुई। सबसे पहले कार्रवाई पूर्व राज्य मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी द्वारा निर्मित पक्के निर्माण से हुई। पूर्व मंत्री के अवैध निर्माण को तोड़ते देखकर अन्य कब्जाधारियों की बोलती बंद हो गई। लोगों ने कार्रवाई के पहले ही सामान हटाने लगे।
कार्रवाई के लिए सयुंक्त टीम
निगम इंफोर्समेंट टीम में चार जेसीबी, ट्रैक्टर ट्राली, डंपर सहित बड़ी सख्या में कर्मचारी और अधिकारी शामिल थे। वहीं जिला प्रशासन की ओर से भिलाई एसडीएम, तहसीलदार सहित जामुल एवं अन्य थानों के पुलिस अधिकारी व जवान उपस्थित थे। @Patrika कलक्टर के निर्देश पर जिला प्रशासन, निगम और पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई के लिए सयुंक्त टीम बनाई है। टीम की उपस्थिति में निगम प्रशासन की टीम तोडफ़ोड़ की कार्रवाई शुरू की। सरकारी और घास जमीन पर बनी दुकानें, मकानों और आवासों को तोडफ़ोड़ कर कब्जा खाली कराया जा रहा है।
हाईकोर्ट में हो चुकी है खारिज
पटवारी हल्का नंबर ५५/१४ के खसरा नंबर ७२५१/१, ७२५, ५६७/१ का टुकड़ा, ६२२, ६२३, ६२९, ६२६/२, ५६७/३ व ४, ६६६, ७२३/१, ५४०/४, ५६१/ ६७०/१, ५५४/१व ५, ५९७, ५६८/१ में कुल ५९.६३ एकड़ जमीन दर्ज है।
पत्रिका ने किया था खुलासा
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद शासन ने अब तक कुरुद की शासकीय जमीन को अपने कब्जे में नहीं लेने के मामले का पत्रिका ने खुलासा किया था। समाचार के माध्यम से यह भी बताया था कि राजस्व मंडल की ओर से मिसल रिकार्ड को दुरूस्त नहीं किए जाने के कारण लोगों ने फायदा उठाया। @Patrikaसरकारी जमीन को लोगों ने टुकड़े में विभाजित कर बेच दिए। जमीन की रजिस्ट्री भी हो गई। खरीदी बिक्री के बाद जो जमीन बची थी। उस जमीन पर लोगों ने मकान और दुकान बना लिए हैं।
27 दिसंबर तक दी गई थी मोहलत
राजस्व न्यायालय ने १४ कब्जाधारियों को १३ सितंबर को नोटिस जारी किया था। ३-३ हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। २७ दिसंबर तक कब्जा नहीं हटाने पर तोडफ़ोड़ की कार्रवाई की चेतावनी दी थी। चेतावनी के बाद कुछ लोगों ने कब्जा हटा लिया है। @Patrika वहीं मकान, दुकान, गोडाउन और बाउंड्रीवॉल खड़ी हुई थी। नगर पुलिस अधीक्षक, थाना प्रभारी, राजस्व निरीक्षक, पटवारी और महिला आरक्षक मौके पर तैनात थे।
जबलपुर हाईकोर्ट ने दिया था फैसला
अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान जबलपुर हाईकोर्ट कुरुद की सरकारी जमीन के मामले में फैसला दिया था। फैसले के अनुसार मिसल रिकार्ड को शून्य और लगभग ५९.६३ एकड़ जमीन को शासन के रिकार्ड में दर्ज किया जाना था, लेकिन जमीन को मिसल रिकॉर्ड में अपडेट नहीं किया गया। छत्तीसगढ़ बनने के बाद जमीन १४ लोगों के नाम पर दर्ज हो गया है। पत्रिका में खुलासा होने के बाद डॉ दिवाकर भारती ने बिलासपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ शासन के विरूद्ध फैसला दिया। कलक्टर को सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे।@Patrika
Updated on:
06 Jan 2018 04:10 pm
Published on:
06 Jan 2018 03:43 pm
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