
भिलाई. गौशाला संचालकों ने कमाई के लिए क्रूरता की सारी हदें पार कर दी थी। उन्होंने स्लो पायजन की तरह पशुओं को तड़पा-तड़पा कर मारा है। पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के चिकित्सकों की रिपोर्ट यह खुलासा हुआ है। मृत 208 गायों में से 81 गायों का पोस्ट मार्टम ही नहीं हो सका। शगुन गौशाला राजपुर, फूलचंद गौशाला गोड़मर्रा और मयूरी गौशाला रानो में मृत गायों के शरीर में ऐसी कोई गंभीर बीमारी के अवशेष नहीं मिले,जिससे गायों की मौत का कारण कहा जा सके। मतलब गायों को भूखा रखकर मार दिया गया।
बहुत दिनों से काफी कम मात्रा में दाना,चारा और पानी मिला
रिपोर्ट के मुताबिक पशुओं के झुंड का भौतिक परीक्षण किया। अधिकांश पशुओं की चमड़ी सूखी थी। पेट अंदर धंसा हुआ था। हड्डियां व अस्थि पंजर उभरी हुई थी। आंख अंदर धंसी हुई थी। चलने फिरने में असमर्थ थी। रफ कोट था। पशुओं के बाह्य म्यूकस मेम्ब्रेन में हल्का पीलापन था। जिससे यह प्रतीत हो रहा था कि बहुत दिनों से काफी कम मात्रा में दाना,चारा और पानी मिला है।
रौंगटे खेड़ कर देगी पोस्टमार्टम रिपोर्ट
मृत पशुओं के शवों का पोस्ट मार्टम किया गया। जिसमें ज्यादातर पशुओं के आहार थैली, आंत में दाना, चारा, पानी बहुत ही कम मात्रा में पाया गया। चमड़ी के नीचे और हृदय के चारों तरफ पाए जाने वाली वसा बहुत ही कम मात्रा में पाई गई। कुछ पशुओं के अंदरूणी अंग में पीलापन मिला। लीवर और गाल ब्लेडर अपने सामान्य आकार से बड़ा पाए गए। यूरिन ब्लैडर में छेद(सांद्र) पाए गए। यूरिन का कलर पीला हो गया था। मवेशियों के पेट में फॉरेन बाडी भी पाया गया। कुछ पशुओं के इंटरनल हैम्मोरेज एवं एक्स फाईक्सीएशन के लक्ष्ण मिले हैं।
केवल 36 का पीएम और पंचनामा
फूलचंद गौशाला के पशुओं के शव सड़-गल जाने एवं परीक्षण करने योग्य नहीं होने की वजह से 81 शवों के पोस्ट मार्टम नहीं करने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। पशु चिकित्सकों का कहना है कि 19 अगस्त को गौशाला के अंदर 109 पशु मृत पाए गए। जिसमें से 33 पशु गौशाला के अंदर प्रांगण में और 76 मृत पशु गौशाला प्रांगण से 500 मीटर की दूरी पर ईंट भट्ठे के पास मिले थे। 109 में केवल 36 पशुओं का शव परीक्षण किया गया। बाकी 73 मृत पशुओं का शरीर सड़ गल गई था। जिन्हें पंचनामा कर दफनाया गया।
पशुओं पर की गई अत्याचार को पहले उजागर किया था
पत्रिका ने गौशाला संचालक आरोपी हरीश वर्मा,उसकी पत्नी लक्ष्मी देवी और उसके साढ़ू एम नारायण के द्वारा पशुओं पर की गई अत्याचार को पहले उजागर किया था। समाचार के माध्यम से बताया था कि तीनों गौशालाओं में क्षमता से अधिक पशुओं को रखा है। गायों की संख्या के हिसाब से गौशाला में जितनी मात्रा में दाना, पैरा या भूसा की व्यवस्था होनी चाहिए, उस हिसाब से व्यवस्था नहीं है। पानी के लिए टंकी, बैठने के लिए शेड नहीं हैं।
आधा दर्जन से अधिक गड्ढे खोदकर दफनाया था
तीनों गौशालाओं में गायों की मौत का आंकड़ा 18 से 30 अगस्त तक का है। इससे पहले 14 और 15 अगस्त को बड़ी संख्या में शगुन गौशाला में गायों की मौत हुई थी। जिसे आरोपी हरीश वर्मा ने बैकहो लोडर से आधा दर्जन से अधिक गड्ढे खोदकर दफनाया था। एक-एक गड्ढे में 4-5 गायों को दफनाया था। इसकी शिकायत १६ अगस्त को गौ रक्षा प्रमुख रोमेन्द्र सिंह ठाकुर, रविशंकर सोनी, ग्राम पंचायत राजपुर की सरपंच के पति सेवा राम साहू ने धमधा थाना प्रभारी और एसडीएम से शिकायत की थी। 16अगस्त को ही एसडीएम गौशाला का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे थे।
Published on:
22 Sept 2017 09:42 am
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