
भिलाई. बीएसपी से सेवानिवृत्त कर्मचारी ने जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र सेक्टर ९ के दूसरी मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी। इस घटना से पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया। घटना गुरुवार सुबह १० बजे की है। वार्ड एफ-वन के दूसरे माले से कूदने की जानकारी मिलते ही उसे लहूलुहान हालत में इलाज के लिए ले जाया गया। नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल आईसीयू में भर्ती कर लिया, जहां उसने दम तोड़ दिया। मृतक सुनिल कुमार घोष (८१) सेक्टर १, सड़क ११ क्र्वाटर ४ बी का निवासी है। इलाज सेक्टर ९ अस्पताल में चल रहा था। वह ब्लडप्रेशर औैर त्वचा रोग से पीडि़त था। बुधवार को वह अपनी ओपीडी बुक लेकर इलाज कराने पहुंचा था। अस्पताल प्रबंधन ने घटना के ढाई घंटे बाद सुनील की मौत हो जाने पर परिवार और पुलिस को सूचना दी।
वे क्रेन डिजाइन सेक्शन में डॉस मैन थे
मृतक सुनील घोष का एक बेटा और दो बेटियां हैं। बेटा चंदन घोष रायपुर में निको कंपनी में काम करता है। वह घर पर नहीं थे। उन्हें सूचना दी गई। उसने बताया कि १९९३ में बीएसपी से रिटायर हुए थे। वे क्रेन डिजाइन सेक्शन में डॉस मैन थे। मेरी पत्नी सुक्ति ने सुबह नास्ते में परांठा बनाया। उसे अच्छे से खाया था। सब कुछ बढिय़ा था। भतीजी बबीता दत्ता ने बताया कि मां (सुनीता घोष) से कहा कि अस्पताल जा रहा हूं। हाथ में खुजली हो रही है उसे दिखाकर आता हूं। उनसे एक बॉटल पानी लिया। वह ९.३० बजे ऑटो से सेक्टर ९ इलाज कराने के लिए ऑटो में बैठ कर चले गए। दोपहर करीब एक बजे अस्पताल के एंबुलेंस कर्मचारी ने मृत्यु की सूचना दी। पड़ौसियों ने बताया कि वह बहुत धीरज वाले इंसान थे।
अस्पताल के लॉकर में रखे सुसाइडल नोट में क्या है?
भिलाई नगर थाना प्रभारी बीआर मरकान ने बताया कि अस्पताल से मेमो अभी नहीं मिला है। सूचना गुरुवार दोपहर करीब १ बजे जानकारी मिली है। बुजुर्ग सुनील घोष इलाज कराने अस्पताल गया था। उसने दूसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर लिया है। उसके हाथ-पैर में फैक्चर आया है। उसके पास से अस्पताल की ओपीडी बुक मिली है। इसके अलावा सुसाइड नोट भी छोड़ा है। अस्पताल प्रबंधन ने सुसाइड नोट, पेनकार्ड, कपड़ेऔर कुछ पैसा को जब्त कर लॉकर में रखवा दिया है। शुक्रवार सुबह पंचनामा के समय पुलिस के सुपुर्द किया जाएगा।
चर्चा में तरह-तरह की बातें आत्मघाती कदम क्यों उठाया
अस्पताल में चर्चा थी कि बुजुर्गों के इलाज में डॉक्टर लापरवाही बरतते हैं। मृतक अस्पताल की व्यवस्था से परेशान था?
उसे इलाज के लिए बार-बार आना जाना पड़ता था। दवा प्राइवेट मेडिकल से लेना पड़ती थी?
वह केजुअल्टी में इलाज कराने गया था तो फिर एफ-वन कैसे पहुंचा? जहां से कूदा वहां बाउंड्रीवॉल है।
परिवार उसे सुलझा हुआ इंसान बता रहा है, जिसे घर में कोई परेशानी नहीं थी तो अचानक क्या हो गया?
मौत के बाद परिवार को सूचना दी, अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को समय पर घटना की जानकारी क्यों नहीं दी?
इसने भी कूदकर दी थी जान
१५ मई २०१४ को सेक्टर-9 हॉस्पिटल का लिफ्ट ऑपरेटर जीवन लाल साहू ५७ वर्ष ने हॉस्पिटल बिल्डिंग से कूदकर जान दे दी। कोतवाली पुलिस मामले की जांच की।
Published on:
29 Dec 2017 09:51 am
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