26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Diwali 2023: दीपावली में केले की मांग को देखते हुए बढ़ा खेती का रकबा, जानें इसका महत्व

Diwali 2023: पूजा-पाठ में केले का विशेष महत्व है। खासकर दीपावली में केले के फल के साथ पौधे और पत्तियों से तोरण द्वार सजाने की परंपरा है।

2 min read
Google source verification
Demand for banana in Diwali, farming area increased Durg

दीपावली में केले की मांग को देखते हुए बढ़ा खेती का रकबा

दुर्ग। Chhattisgarh News: पूजा-पाठ में केले का विशेष महत्व है। खासकर दीपावली में केले के फल के साथ पौधे और पत्तियों से तोरण द्वार सजाने की परंपरा है। इस दिन घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में मुख्य द्वार को केले के पौधे लगाकर सजाया जाता है। लिहाजा दीपावली में केले के फल के साथ पौधों की भी खासी डिमांड रहती है। इसके चलते जिले में केले की खेती पर भी रूझान बढ़ा है। जिले के किसानों के खेतों में इस बार भी केले के पौधे दीपावली की बाजार सजाने को तैयार हैं।

100 करोड़ का कारोबार

जिले में हर साल करीब 54 हजार मिटरिक टन केले की पैदावार होती है। थोक बाजार में इनकी कीमत औसत 2 रुपए किलो भी मानें तो इससे करीब 100 करोड़ का कारोबार हो रहा है। केले की खरीदारी व्यापारी किसानों के खेतों तक आकर कर लेते हैं। इससे बाजार के लिए भटकन के अलावा परिवहन की समस्या से भी मुक्ति मिल जाती है।

यह भी पढ़े: पामगढ़ विधानसभा सीट, लोगों ने कहा- औद्योगिक और व्यावसायिक दृष्टि से यह क्षेत्र आज भी पिछड़ा

बांग्लादेश से अरब तक डिमांड

जिले में उत्पादित केले की डिमांड बांग्लादेश व पाकिस्तान के साथ अरब देशों में भी होती है। इसके अलावा देश में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में अच्छी डिमांड है। इसके चलते बड़े शहरों के व्यापारी यहां के किसानों से संपर्क कर एकमुश्त पैदावार खरीद लेते हैं।

1894 हेक्टेयर में खेती

दुर्ग जिले में 1894 हेक्टेयर क्षेत्रफल में केले की खेती होती है। इससे करीब 53 हजार 90 मिटरिक टन केले की पैदावार होती है। केले के एक पौधे में कम से कम 25 से 35 किलो फल लगता है। एक एकड़ में 1200 से 1300 पौधे लगते हैं। इस तरह प्रति एकड़ पैदावार 30 से 35 टन प्रति एकड़ तक पैदावार निश्चित होती है। केले का एक पेड़ तीन सीजन तक फल देता है।

यह भी पढ़े: सात बार के विधायक से महंत का मुकाबला...साहू, ब्राह्मण व मुस्लिम वोटर होंगे निर्णायक भूमिका