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2289 करोड़ से 2 साल में बनेगा दुर्ग-रायपुर इकॉनोमिक कॉरिडोर

दुर्ग-रायपुर के बीच भारत माला प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित इकॉनोमिक कॉरिडोर का काम शुरू हो गया है। शुरूआती चरण में सॉइल टेस्टिंग और मार्किंग के बाद अब प्रस्तावित जमीन का समतलीकरण शुरू कर दिया गया है। 2289 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के तहत जिले के दुर्ग और पाटन ब्लाक के बीच करीब 44.50 किमी सिक्सलेन सड़क बनाई जाएगी।

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 नए बायपास से घट जाएगी दूरी, सिक्सलेन सड़क निर्माण के लिए समतलीकरण शुरू

सिक्सलेन सड़क निर्माण के लिए समतलीकरण शुरू

दुर्ग. दुर्ग-रायपुर के बीच भारत माला प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित इकॉनोमिक कॉरिडोर का काम शुरू हो गया है। शुरूआती चरण में सॉइल टेस्टिंग और मार्किंग के बाद अब प्रस्तावित जमीन का समतलीकरण शुरू कर दिया गया है। 2289 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के तहत जिले के दुर्ग और पाटन ब्लाक के बीच करीब 44.50 किमी सिक्सलेन सड़क बनाई जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा करीब साल पर पहले जारी किए गए वर्क प्लान के मुताबिक 2024 तक सड़क का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।

3 जिले के 2330 किसानों की जमीन अधिग्रहित
दुर्ग से नया रायपुर के बीच भारत माला परियोजना के तहत करीब 92 किलोमीटर सिक्स-लेन इकॉनोमिक कॉरिडोर बनाया जाना। यह सड़क राजनांदगांव के देवादा के पास से प्रारंभ होकर नया रायपुर से आरंग तक जाएगी। इस बीच सड़क राजनांदगांव, दुर्ग, पाटन, अभनपुर और आरंग तहसील से होकर गुजरेगी। इसके लिए 3 जिले के 2330 किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई है। इनमें जिले के दुर्ग व पाटन ब्लॉक के 26 गांव के 1349 किसानों की जमीन भी शामिल है।

अंजोरा से सिपकोन्हा तक जाएगी सड़क
जिले में सड़क अंजोरा के पास बायपास से शुरू होकर पाटन के ठकुराईनटोला सिपकोन्हा खारून नदी तक जाएगी। जिले में अंजोरा, थनौद, पुरई, उमरपोटी, उतई, खोपली, पतोरा, मुड़पार, फूंडा, लोहरसी, तुलसी, देमार, बठेना होकर ठकुराइनटोला व सिपकोन्हा तक जाएगी।

इस तरह बनना है सिक्सलेन कॉरीडोर
- राजनांदगांव के टेड़ेसरा के पास से शुरू होकर रायपुर जिले के आरंग में समाप्त होगी।
- यह मुम्बई कलकत्ता कॉरीडोर दुर्ग रायपुर बायपास की कुल लंबाई 92.200 किलोमीटर।
- सड़क राजनांदगांव, दुर्ग व रायपुर जिले और राजनांदगांव, दुर्ग, पाटन, अभनपुर, आरंग तहसील से गुजरेगी।
- सड़क की चौड़ाई 70 मीटर होगी।
- सड़क के लिए कुल 746.61 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव।
- सड़क निर्माण में सिविल कार्य में 1382 करोड़ खर्च होगी। कुल प्रोजेक्ट में 2689 करोड़ खर्च का अनुमान है।
- सड़क शिवनाथ, खारून और महानदी से होकर गुजरेगी
- सड़क में 6 बड़े पुल, 27 छोटे पुल, 167 पुलिया, 2 फ्लाइ ओवर, 1 क्लोवरलीफ इंटरचेंज, 3 ट्रम्पेट एंटरचेंज और 39 अंडर ब्रिज बनेंगी।
- सड़क के साथ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनाई जाएगी।
- र्क प्लान के मुताबिक 2024 तक कार्य पूरा किया जाना है।

घट जाएगी 20 किलोमीटर दूरी
अभी दुर्ग से नई राजधानी जाने के लिए फोरलेन पर 35 किलोमीटर रायपुर तक जाना होता है। रायपुर शहर के बीच से करीब 10 से 15 किलोमीटर गुजरना पड़ता है। इसके बाद नई राजधानी की दूरी करीब 25 किलोमीटर है। इस तरह 70 से 75 किलोमीटर की दूर तय करना पड़ता है। यह दूरी घटकर करीब 55 किलोमीटर हो जाएगी। इस तरह 20 किलोमीटर कम चलना पड़ेगा।

कॉरिडोर से यह होगा फायदा
फोरलेन पर दबाव कम होगा
दुर्ग से रायपुर के बीच फोरलेन पर यातायात का दबाव ज्यादा हो गया है। बायपास बन जाने से नई राजधानी पर आरंग सरायपाली से कोलकाता रूट पर जाने वाली को विकल्प मिल जाएगा। फोरलेन पर दबाव आधा हो जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्र का होगा विकास
सड़क दुर्ग-भिलाई के आउटर से होकर निकलेगी और उतई से पाटन तक ग्रामीण इलाके से होकर गुजरेगी। एक्सप्रेस हाइवे से आवागमन की सुविधा के साथ इससे लगे इलाकों का भी तेजी से विकास होगा।

भीड़ व जाम से मिलेगी मुक्ति
दुर्ग से भिलाई होकर रायपुर जाने के लिए फोरलेन पर भीड़भाड़ से होकर गुजरना पड़ता है। इस बीच फोरलेन पर भिलाई व रायपुर के टोल रोड पर अक्सर जाम की स्थिति बनती है। नए बायपास से न सिर्फ दूरी घट जाएगी बल्कि भीड़ व जाम जैसा समस्या भी नहीं झेलनी पड़ेगी।

चार साल लेट, 408 करोड़ बढ़ी लागत
प्रशासनिक लेटलतीफी के कारण दुर्ग और रायपुर के बीच प्रस्तावित भारत माला परियोजना की सिक्सलेन एक्सप्रेस कॉरिडोर का प्रोजेक्ट कास्ट 408 करोड़ रुपए बढ़ गया है। प्रारंभिक अधिसूचना के दौरान सड़क निर्माण की लागत 2281 करोड़ आंकी गई थी। 4 साल विलंब के कारण करीब सालभर पहले जारी किए गए रिवाइज्ड कास्ट में 2689 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। इधर जमीन अधिग्रहण के एवज में मुआवजे की गणना को लेकर विवादों के कारण करीब 200 मामले हाईकोर्ट में लंबित है। किसानों ने अधिग्रहण और मुआवजे की गणना की परीक्षण को लेकर अलग-अलग याचिका लगाई है। इनमें पाटन और दुर्ग के अलावा आरंग के भी किसान शामिल हैं। हाईकोर्ट ने मामले में राज्य शासन से जवाब भी मांगा है।