
भिलाई. समुद्र के बीच जहां अलावा पानी के कुछ नजर नहीं आता, वहां मशीनों के बीच घंटों गुजारना हर किसी के बात नहीं। पर दुर्ग की ऐश्वर्या स्टीमर के पूर्जे-पूर्जे को संभालती है। मरीन इंजीनियर ऐश्वर्या का काम आसान नहीं। 10 से 15 घंटे तक मशीनों के बीच 50 से 53 डिग्री सेल्सियस के तापमान में रहकर वे मशीनों को ऐसे सुधारती हैं कि उनके पुरुष साथी इंजीनियर भी देखते रह जाते हैं।
ऐश्वर्या संभवत: शहर की पहली बेटी
मरीन इंजीनियरिंग बनकर एस्सार शिपिंग कंपनी में बतौर इंजीनियर अपनी सेवा दे रही ऐश्वर्या संभवत: शहर की पहली बेटी है जो शहर का नाम रौशन कर रही है। वह कहती है कि इस फील्ड में लड़कियां आती ही नहीं और जो आती है उसे भी आगे आने का बेहतर मौका नहीं मिल पाता। लोगों को अपनी सोच बदलकर बेटियों को भी इस फील्ड में जाने प्रेरित करना चाहिए। वह बताती है कि पिता आशुतोष और मां वर्षा चौरसिया ने उसका हौसला बढ़ाया जिसकी वजह से वह आज इस मुकाम तक पहुंच सकी।
कॉलेज में थी अकेली
डीपीएस भिलाई से स्कूलिंग करने के बाद ऐश्वर्या ने मरीन इंजीनियरिंग की राह चुनी। बिट्स पिलानी के पूणे के कॉलेज से उसने मरीन ब्रांच में इंजीनियरिंग की। इस पूरे चाल साल वह क्लास में अकेली लड़की थी। उसने बताया कि इस फील्ड में लड़कियां आना नहीं चाहती, क्योंकि इसमें 6 महीने तो शिप में ही बीतते हैं।
लड़की थी इसलिए नहीं दिया मौका
ऐश्वर्या बताती है कि कॉलेज में जर्मनी, जापान की कंपनियां प्लेसमेंट के लिए आई पर जापान की कंपनी ने पहले ही इंडियन गल्र्स के लिए नो वैकेसी रखी और जर्मनी की कंपनी ने उसका इंटरव्यू तो लिया पर लड़की होने की वजह से उसे मौका नहीं दिया। वह बताती है कि भारत की लड़कियों को मौका नहीं देने के विदेशी कंपनी एक बड़ा कारण यह भी मानती है कि शादी के बाद वे जॉब छोड़ जाएंगी, जबकि विदेशी लड़कियां शादी के बाद भी अपना काम जारी रखती है। उसने बताया कि उसकी कंपनी में 2 और लड़कियां है पर वे मशीनरी में न रहकर नेविकेशनल वर्क में है। पर उसने मशीनरी सेक्शन को ही चुना
80 से ज्यादा मशीनरी की जिम्मेदारी
शिप में लगी 80 से ज्यादा मशीनरी को मेंटेन रखने की जिम्मेदारी 13 मरीन इंजीनियरिंग की है। जिसमें से एक ऐश्वर्या भी है। 10 से 15 घंटे की ड्युटी के बाद भी कई बार ऐसे मौके भी आए जब रात 2 बजे भी कहीं ब्रेकडाउन की स्थिति में काम करने वापस आना पड़ता है।
6 महीने शिप पर
ऐश्वर्या बताती है कि शिप में जाने के बाद परिवार से आसानी से बात नहीं हो पाती। जब तक शिप पोर्ट तक नहीं पहुंचता मोबाइल में नेटवर्क भी नहीं मिलता। पर अपनी दादी के बर्थडे पर उसने शिप के स्पेशल सेटेलाइट फोन से बात की थी। ऐेश्वर्या ने पहली पोस्टिंग के दौरान बहरेन, सिंगापुर और आस्ट्रेलिया की यात्रा की। कंपनी उन्हें 6 महीने के लिए बुलाती है उसके बाद आगे का एग्रीमेंट बनता है।
Published on:
20 Apr 2018 12:17 pm
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