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सीआईएमटी इनटेक शून्य, नहीं होंगे एडमिशन, तीन और इंजीनियरिंग कॉलेजों की सीटें घटाईं

छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों की 20240 सीटों में से इस साल लगभग दो हजार सीटें घट जाएंगी।

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CIMT college

भिलाई . छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों की 20240 सीटों में से इस साल लगभग दो हजार सीटें घट जाएंगी। इंजीनियरिंग कॉलेज संचालकों ने खुद अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से सीटें कम करने की गुहार लगाई है। यही नहीं भिलाई-३ के छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी को इस साल जीरो इनटेक घोषित कर दिया गया है। कॉलेज संचालक के मुताबिक इंजीनियरिंग की खराब स्थिति को देखते हुए कुछ वर्षों के लिए ब्रेक इन अप्रूवल लिया गया है। यानि इस साल इस कॉलेज में एडमिशन नहीं होंगे। इसके अलावा तीन और इंजीनियरिंग कॉलेज भी हैं, जिनमें खामियां मिलने की वजह से एआईसीटीई ने इनकी सीटें 50 फीसदी घटा दी है।

एआईसीटीई के निरीक्षण में मिली थी खामियां
एआईसीटीई की टीम ने करीब ६ महीने पहले सीआईएमटी, गर्व इंस्टीट्यूट, सीआईटी रायपुर और रावतपुरा सरकार इंजीनियरिंग कॉलेज का औचक निरीक्षण किया था। सूत्रों के मुताबिक चारों ही कॉलेजों में टीम को कमियां मिली थी, जिसके बाद इनकी सीटें घटाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। हालांकि कॉलेजों को परिषद ने अपील के लिए भी बुलाया, लेकिन बात नहीं बनीं। ये तो ुहुई इन कॉलेजों की बात। सीएसवीटीयू को करीब आधा दर्जन ऐसे कॉलेजों के आवेदन मिले हैं, जिसमें उन्होंने विभिन्न ब्रांचों की सीटों में कटौति के लिए कहा है। जल्द ही कार्यपरिषद की बैठक में इस मसले पर फैसला आएगा।

इस साल आए पीईटी के सबसे कम आवेदन
इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए होने वाले प्री-इंजीनियरिंग टेस्ट के आवेदनों में इस साल जबरदस्त कमी देखने को मिला है। पिछले साल जहां २८ हजार आवेदकों ने पीईटी के फार्म भरे थे, जबकि इस साल महज २१ हजार फार्म ही जमा हुए हैं। यानि एक साल के अंतराल में ७ हजार ने इंजीनियर बनने से तौबा कर ली। इन आंकड़ों ने कॉलेज संचालकों के माथे पर पसीना ला दिया है। चुनिंदा कॉलेजों को छोड़कर शेष ेमें एडमिशन को लेकर अभी से चिंता की लहर दौड़ पड़ी है। ३ मई को पीईटी की परीक्षा में शामिल होने वालों का आंकड़ा ही काउंसलिंग का ग्राफ भी तय करेगा।

कैसा होगा एडमिशन का ग्राफ
पीईटी के २१ हजार आवेदकों में से करीब १५ हजार ही परीक्षा में शामिल होंगे। इसमें से ५ हजार ही होंगे, जो काउंसलिंग में भाग लेकर कॉलेजों में एडमिशन कराएंगे। यानि १५ हजार से अधिक सीटें इस साल भी खाली रहे जाएंगी। करीब ढेड़ हजार छात्र शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों की ओर रख करेंगे, जबकि शेष बची ३५०० सीटें निजी कॉलेजों के हाथ लगेंगी। ये सीटें भी प्रदेश के चुनिंदा कॉलेजों की ही भरी जाएंगी, जबकि २५ से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज एक बार फिर एडमिशन पाने को तरसते दिखेंगे।

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10+2 का नियम लागू कराने का प्रस्ताव
मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों को बारहवीं के अंकों के आधार पर सीधे इंजीनियरिंग में दाखिला मिले।

जेईई का कटऑफ हटाने की मांग
जेईई की ८० फीसदी कोटे की सीटें खाली रह जाती है। क्योंकि अभी कटऑफ ० से ३६ है। इससे कम वाले विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जाता। नियम में बदलाव हो।

स्कॉलरशिप की राशि में हो इजाफा
सरकारी स्कॉलरशिप के तौर पर १८ से २२ हजार रुपए तक दिए जाते हैं। विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप की रकम कॉलेज की फीस के बराबर दी जाए। इससे एडमिशन का ग्राफ भी तेजी से बढ़ेगा।

वर्जन .
एआईसीटीई से ब्रेक इन अप्रूवल लिया है। नए सत्र में इनटेक जीरो रहेगा। अभी कॉलेज में दो वर्षों के विद्यार्थी पढ़ रहे हैं, उन्हें राजनांदगांव स्थिति कॉलेज में ट्रांसफर करना है या नहीं इसको लेकर निर्णय नहीं लिया गया है।
धीरज कन्नौजे, डायरेक्टर, सीआईएमटी

वर्जन .
इस साल इंजीनियरिंग की सीटें घट सकती हैं। कुछ कॉलेजों ने भी खुद से भी सीटें घटाने आवेदन किया था। एआईसीटीई ने अभी निर्देश नहीं मिले हैं। सीआईएमटी का इनटेक इस साल शून्य किया गया है।
डीएन सिरसांत, रजिस्ट्रार, सीएसवीटीयू

वर्जन .
एडमिशन की खराब स्थिति को देखते हुए हमने खुद ही इनटेक कम करने के लिए एआईसीटीई को कहा था। पूर्व में निरीक्षण के वक्त ही यह तय हो गया था कि सीटें घटेंगी।
लक्ष्मी धु्रव, डायरेक्टर, गर्व इंजीनियरिंग