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गैंगस्टर तपन सरकार दुर्ग जेल से चलाता है उगाही का धंधा

गैंगस्टर तपन जेल के अंदर से मोबाइल फोन और गुर्गों के जरिए बाहर अपराध की दुनिया में अपना सिंडिकेट ऑपरेट करता है।

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गैंगस्टर तपन सरकार दुर्ग जेल से चलता है उगाही का धंधा

भिलाई-दुर्ग . अपराध की दुनिया में कभी गुर्गे की हैसियत से कदम रखने वाला तपन सरकार गैंगस्टर बनकर अपनी हुकूमत चलाने लगा। जेल जाने के बाद अंदर भी उसका साम्राज्य था और बाहर अपराध जगत में उसने हुकूमत जमा रखी थी। यहीं से वह मोबाइल फोन और गुर्गों के जरिए बाहर अपराध की दुनिया में अपना सिंडिकेट ऑपरेट करता है।
गैंगस्टर जिस तरह से जेल में बैठकर अपना दबदबा बनाए हुए था, उसकी कहानियां तो बनती रहीं, लेकिन यह मामला उस वक्त सुर्खियों में आया जब चिटफंड कंपनी की जमीन के करोड़ों के सौदे में उसका नाम आया। चार मोबाइल फोन के जरिए जमीन के सौदे से लेकर उगाही के लिए धमकाने की शिकायत ने दुर्ग-भिलाई पुलिस के होश उड़ा दिए। प्रदेश की सबसे सुरक्षित दुर्ग केंद्रीय जेल से गैंगस्टर तपन सरकार ने उस जमीन का सौदा करा दिया, जिसे चिटफंड कंपनी यशग्रुप का जेल में बंद संचालक 100 करोड़ की बताता था। चिटफंड कंपनी के निवेशकों की रकम लौटाने सरकार बंधक रखे हुए थी। इस जमीन से निवेशकों की रकम लौटाने की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले गैंगस्टर ने इसके सौदे की साजिश को अंजाम दे डाला।

पुलिस ने परतें खोलीं तो दुर्ग जेल में निकली सुरंग
कहते हैं दुर्ग जेल में गैंगस्टर तपन सरकार की मर्जी के बिना परिन्दा भी पर नहीं मार सकता। पुलिस की तफ्तीश में फिलहाल जो बातें सामने आई हैं वह बेहद चौंकाने वाली हैं। जेल में बैरक बांटने से लेकर तमाम वो काम गैंगस्टर की मर्जी से होते हैं जो बंदियों के लिए जेल मैन्युअल में हैं। खासतौर पर जेल में आने वाली मोटी मछलियों पर तपन की सीधी नजर रहती है, जिनसे तगड़ी कमाई होती है। अपराधिक मामलों में समझौता कराने, गवाहों को धमकाने का काम भी पैसा लेकर करता है।

बैरक बांटना हो या ट्रांसफर, सब तपन के इशारे पर
जेल में आने वाले हर शख्स को चाहे वह सजायाफ्ता हो या फिर किसी आरोप में न्यायिक रिमांड पर आया विचाराधीन बंदी हो, उसको किस बैरक में और किस जगह पर रहना है उसका फैसला गैंगस्टर तपन करता है। इसके एवज में मोटी रकम वसूल की जाती है। खाने-पीने की सुविधा हो या घर की याद सताने पर मोबाइल से बात कराने का इंतजाम, सब गैंगस्टर तपन के इशारे पर होता है।

जेल में रकम नहीं पहुंचे तो बंदी के घर पहुंच जाते हैं गुर्गे
गैंगस्टर सुविधा के बदले रकम तय कर देता है, जब तक जेल में हो, तब तक रकम देना पड़ती है। जो बंदी जेल में रकम नहीं पहुंचा पाते, उनके घर जाकर तपन के गुर्गे वसूली करते हैं। रकम का एकमुश्त इंतजाम नहीं होने पर किस्तों में वसूली की जाती है। नगद नहीं होने पर जमीन, घर या गहने गिरवी रखकर ब्याज पर भी रकम बांटी जाती है।