
भिलाई. छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी परिषद् रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, अंजोरा मेें राज्य मे बकरी पालन की संभावनाएं एवं चुनौती विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में लगभग 80 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉं. पीएल चौधरी, निदेशक विस्तार शिक्षा, छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग थे। अध्यक्षता डॉं. एसपी तिवारी, अधिष्ठाता, पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय दुर्ग एवं विश्ष्ठि अतिथि के रूप में डॉ. राठिया उपसंचालक, पशुधन विकास विभाग दुर्ग उपस्थित थे।
विशिष्ठ अतिथि डॉ. बीपी राठिया शासन की विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रशिक्षणार्थियों को दी। डॉं. एसपी तिवारी ने राज्य मे बकरी पालन की संभावनाएं एवं चुनौती विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने बकरियों के आहार प्रबंधन पर विस्तृत जानकारी दी। साथ ही प्रशिक्षणर्थियों को बकरी पालन पर प्रशिक्षण प्राप्त कर ग्रामीण पशुपालकों को तकनीकी ज्ञान प्रदान करने कहा। ग्रामीण स्तर पर बकरी पालन में तकनीकी कमियों को महाविद्यालय के विषय विशेषज्ञों को अवगत कराने कहा।
विशेषज्ञों ने बताया कि बकरी पालन के माध्यम से स्वयं का रोजगार खड़ाकर व्यक्ति स्वालंबी बन सकता है। पशुचिकित्सा एवं पशुपालन के साथ-साथ वह चिकित्सक एक बड़ा उद्यमी बन कर समाज को नई दिशा प्रदान कर सकता है। साथ ही देश की आर्थिक स्थिति में अह्म भूमिका अदा कर सकता है।
मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि पशुचिकित्सा एवं पशुपालन में जो विद्यार्थी अध्धयन कर रहे है वे पशुपालकों एवं गांव में जनता के बीच जा कर उनमें उत्साह एवं मार्गदर्शन प्रदान करें। किसानों एवं गांव की जनता को प्रेरित कर अपनी सेवाएं प्रदान करे।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ विकास खुने, डॉं. मीनू दुबे, डॉ. महेश पोयाम, डॉं हमेश रात्रे एवं डॉं. किरण कुमारी ने बकरी पालन विषय से सबंधित प्रबंधन, पोषण, बिमारियां, टीकाकरण, पशु प्रजनन संबंधित बीमारियों एवं निदान आदि के संबध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यशाला में डॉ. दिलीप चौधरी एवं डॉ. किरण की विशेष भूमिका रही है।
Published on:
26 Mar 2018 03:49 pm
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