
बीएड कॉलेजों के लिए राहत की खबर : असिस्टेंट प्रोफेसर की योग्यता में पीएचडी की अनिवार्यता खत्म
भिलाई . संभाग के बीएड कॉलेजों के लिए राहत की खबर है। बीएड के असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए अब पीएचडी की अनिवार्यता खत्म हो गई है। हाल में हेमचंद विवि की कार्यपरिषद में यह निर्णय लिया गया है। विवि ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद की ओर से पूर्व में लिए गए निर्णय पर अब मुहार लगाई है।
नेट की बाध्यता असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए होगी या नहीं ?
इसी तरह एसोसिएट प्रोफेसर के लिए पीएचडी अनिवार्य नहीं होगी। विवि ने अभी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं किया है कि आखिरी नेट की बाध्यता असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए होगी या नहीं। यानि विवि ने सिर्फ पीएचडी के संबंध में ही जानकारी दी है। रजिस्ट्रार डॉ. राजेश पांडेय का कहना है कि कार्यपरिषद की बैठक में एनसीटीई के नियम को लागू करने की सूचना दी गई है, फिलहाल नए बदलाव को पूरी तरह से समझने के बाद ही विवि इस पर अधिसूचना जारी करेगा।
काउंसलिंग : पहले चरण में 7332 सीटों पर प्रवेश
बीएड की काउंसलिंग का पहला चरण समाप्त हो गया है। इस साल कॉलेज संचालकों को एडमिशन के लिए परेशान नहीं होना पड़ रहा। प्रदेश के बीएड कॉलेजों में १४ हजार ५० सीटें हैं, जिनमें से पहले ही राउंड में ७३३२ सीटों पर प्रवेश हो गए। यानि ५० फीसदी। ट्विनसिटी के बड़े बीएड कॉलेजों में ७० फीसदी तक प्रवेश पूरे हो गए हैं। कॉलेज संचालकों का कहना है कि इस साल सभी सीटों पर प्रवेश होंगे। अगले साल बीएड चार वर्षों का हो जाएगा, इसलिए भी विद्यार्थियों ने प्रवेश को लेकर संजीदगी दिखाई है। बीएड काउंसलिंग का दूसरा चरण गुरुवार से शुरू हो गया है।
नेट पर संशय बरकरार
डॉ. राजेश पांडेय, रजिस्ट्रार, दुर्ग विश्वविद्यालय ने बताया कि बीएड टीचर नियुक्ति के लिए एनसीटीई ने संशोधन किए हैं, विवि उसे लागू कराएगा। इससे पहले नियम को समझना जरूरी है। इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए पीएचडी होना अनिवार्य नहीं किया गया है, लेकिन नेट चाहिए या नहीं यह नियम देखने के बाद ही अधिसूचना जारी करेंगे।
Published on:
16 Aug 2018 11:35 pm
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