
हेरापंचमी के दिन देवी लक्ष्मी के गुस्से का शिकार बन गए महाप्रभु जगन्नाथ, जानिए क्यों तोड़ा रथ
भिलाई. पति और पत्नी के बीच अगर झगड़ा न हो तो ऐसा कभी नहीं हो सकता। हेरापंचमी के दिन महाप्रभु(Lord Jagannath) स्वयं अपनी पत्नी देवी लक्ष्मी के गुस्से का शिकार हो गए। देवी लक्ष्मी को तो उन्होंने किसी तरह अपनी बातों में उलझाकर मना लिया पर बेचारे पुजारी पर क्या गुजरी यह तो वे ही जाने, क्योंकि गुंडीचा मंडप के बाहर तो उनके अनुचरों ने तो पुजारी को रथ से ही बांध दिया और तो और महाप्रभु का रथ भी माता के आदेश से तोड़ दिया। (Bhilai news)
रथ की दिशा को मोड़ दिया
इधर महाप्रभु(Lord Jagannath) ने भी एक सामान्य पति की तरह देवी को कुछ इस तरह मनाया कि उन्हें देर इसलिए हो गई कि वे उनके लिए श्रृंगार के लिए सामान ले रहे थे और उनके लिए मिठाइयां भी मंगवाई है। अब इस वजह से देर हो गई। देवी लक्ष्मी भी महाप्रभु की बातों को सच मान बैठी और वापस श्रीमंदिर लौट गई। कुछ ऐसा ही प्रसंग शहर के गुंडीचा मंडप सेक्टर 6 और सेक्टर 10 में सोमवार की रात जीवंत हो उठा जब यहां हेरापंचमी की रस्म निभाई गई। इसके बाद देवी लक्ष्मी की तसल्ली के लिए रथ की दिशा भी श्रीमंदिर की ओर मोड़ दी गई।
सामने जेठ बैठे इसलिए पर्दे की आड़
सेक्टर-4 श्री जगन्नाथ मंदिर के महासचिव सत्यवान नायक ने बताया कि हेरापंचमी की रस्म के दौरान महाप्रभु और देवी लक्ष्मी के बीच बहस होती है। नाराज लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से कई सवाल करती हैं, उससे पहले वहां बैठे बड़े भाई बलभद्र से पर्दा कर लेती है। क्योंकि जेठ के सामने वह कैसे आए। मंडप में इस रस्म को निभाने बलभद्र के सामने पर्दा लगा दिया गया, ताकि देवी लक्ष्मी महाप्रभु से संवाद कर सकें। जब वे गुंडीचा मंडप में प्रभु को देखती हंै कि वे मौसी के घर खूब मौज कर रहे हैं तो वे इसलिए नाराज होती है कि प्रभु उन्हें साथ लेकर क्यों नहीं आए और घर पर अकेला क्यों छोड़ा? महाप्रभु ने भी उनसे वादा किया कि अब से वे जहां भी जाएंगे उन्हें साथ लेकर जाएंगे। (Bhilai news)
ओडिशा के लोकगीतों के माध्यम से देवी लक्ष्मी को लेकर आई महिलाओं ने इस रस्म को निभाया। सदस्यों अनिमा स्वाईं,सुजाता साहू, रीना नायक,जमुना नाहक, रीता स्वाईं,सुलोचना बिस्वाल,झुनु महान्ति, रीता, ममता सतपथी, शैलबाला पात्रो, संध्या महापात्र,प्रियंका राउल,शिवांगी राऊल, ममता नायक आदि इस रस्म में शामिल हुई। पूजा का कार्यक्रम पुरोहित पितवास पाढ़ी, निलाचल दास ने कराया।
अक्षीति बनी देवी लक्ष्मी बदली रथ की दिशा
सेक्टर 6 मंदिर से बालिका अक्षीति मिश्रा देवी लक्ष्मी के रूप में श्री मंदिर से बाजे गाजे के साथ गुंडीचा मंडप पहुंची। इस अवसर पर अक्षयपात्र के सन्यासियों के भजन पर महिला पुरुषों ,बच्चों ने नृत्य करते हुए बग्गी में माता लक्ष्मी को मंडप तक लाया जहां हेरा पंचमी की पूरी रस्म निभाईं। इस अवसर पर रथ की दिशा भी बदल दी गई।
कार्यक्रम में उत्कल सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष ललित पाणिग्रही, सचिव गजेंद्र पंडा, सहसचिव अशोक पंडा, हेमन्त विश्वाल, सुभाष साहू, अरुण पण्डा संतोष महाराणा, गोलक नाथ भुइया, अमरेश पाढ़ी, सुभाष प्रसाद,रवि मूर्ति ,राजेंद्र पण्डा ,जितेंद्र भुइया ,दंड पाणी पात्रों ,रघुनंदन पंडा, रविन्द साहू, ममता साहू आदि ने सहयोग दिया। राजलक्ष्मी पण्डा, विजय लष्मी पाणिग्रही, निरुपमा पंडा, ममता विश्वाल,प्रतिमा पंडा,निनोति नायक, ज्योतिमयी पंडा , कल्पना पण्डा आदि ने अपना सहयोग दिया। (Bhilai news)
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Published on:
09 Jul 2019 10:48 am
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