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सुबह का भूला शाम को घर लौटे तो… पति ने हाथ जोड़कर मांगी माफी तो पिघल गया पत्नी का दिल, फिर हुआ ये चमत्कार

Bhilai News: कहते हैं कि सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते… शनिवार को इसी तर्ज पर पति के प्रायश्चित करने पर पत्नी का दिल पिघल गया और...

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सुबह का भूला शाम को घर लौटे तो... पति ने हाथ जोड़कर मांगी माफी तो पिघल गया पत्नी का दिल, फिर हुआ ये चमत्कार

Bhilai News: कहते हैं कि सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते… शनिवार को इसी तर्ज पर पति के प्रायश्चित करने पर पत्नी का दिल पिघल गया और दाम्पत्य जीवन टूटने से बच गया। यह संभव हुआ नेशनल लोक अदालत में न्यायालय की समझाइश पर। न्यायिक मजिस्ट्रेट कामिनी जायसवाल ने पति-पत्नी दोनों को समझाइश दी।

पति राहुल साहू पर आरोप था कि उसने पत्नी कुमारी साहू पर संदेह करते हुए मारपीट की। जिस पर पत्नी की रिपोर्ट पर पति के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट की समझाइश पर पति राहुल साहू अपने किए पर पछतावा करते हुए खुले न्यायालय में पत्नी के सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गया और माफी मांगने लगा। इस पर पत्नी ने भी बड़ा दिल दिखाते हुए क्षमा किया और भविष्य में ऐसा नहीं किए जाने के वादे पर साथ रहने को तैयार हो गई। इसके बाद पति पत्नी दोनों ने न्यायालय के सामने आजीवन साथ निभाने का वादा किया।

मामा-भांजे की बीच लड़ाई हुई खत्म

नेशनल लोक अदालत में न्यायालय की समझाइश पर मामा-भांजे ने विवाद खत्म कर पारिवारिक मेल मिलाप के साथ रहने का भरोसा दिलाते हुए राजीनामा कर लिया। मामले में मामा संजय यादव के खिलाफ भांजे अजय यादव ने मारपीट, धमकी के लिए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। न्यायालय में दोनों को पारिवारिक जीवन का महत्व बताकर समझाइश दी। इस पर मामा व भांजे दोनों ने राजीनामा की इच्छा जाहिर की।

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जमीन बंटवारा विवाद खत्म, साथ आया परिवार

इसी तरह जमीन के बंटवारे के विवाद का भी खात्मा लोक अदालत में राजीनामा के आधार पर कराया गया। जमीन बंटवारे को लेकर परिवार के रिश्तेदारों के बीच वाद-विवाद इतना अधिक बढ़ गया कि मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत हो गया। नेशनल लोक अदालत में दोनों पक्ष को बैठाकर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के विनोद कुजूर व संबंधित खंडपीठ के पीठासीन अधिकारी विरेन्द्र सिंह ने समझाइस दी। इस पर दोनों पक्षकार आपस में राजीनामा कर मामला समाप्त कर लिया।

शनिवार को जिला न्यायालय में इस साल का दूसरा नेशनल लोक अदालत लगा था। नेशनल लोक अदालत में 29 खण्डपीठ में मामलों की सुनवाई की गई। नेशनल लोक अदालत में कुल 17 हजार 993 न्यायालयीन प्रकरण तथा 5 लाख 18 हजार 767 प्री-लिटिगेशन प्रकरण निराकृत हुए। जिनमें कुल समझौता राशि 48 करोड़ 25 लाख 40 हजार 385 रूपए रहा।