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आयकर विभाग खोल रहा पुराने मामले, ट्विनसिटी में दो हजार को मिले नोटिस, 10 हजार करदाता दायरे में

इस कार्यवाही का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को रिटर्न भरने के लिए प्रेरित करना है।

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CA Bhilai

CA Bhilai

भिलाई . आयकर विभाग 6 साल पुराने केस दोबारा से खोल रहा है। भिलाई-दुर्ग में भी करीब 1100 आयकरदाता को नोटिस जारी किए हैं। पिछले छह वर्षों में अगर किसी ने 30 लाख से अधिक की प्रॉपर्टी खरीदी है, कोई म्यूच्यूअल फंड में १० लाख से अधिक का निवेश किया है, सेविंग खाते में दस लाख से अधिक नकद जमा है, या विभाग को किसी स्त्रोत से करदाता के सम्बन्ध में कोई जानकारी मिली है तो उन सब की जांच करने के लिए यह नोटिस जारी किए गए हैं। जो लोग नियमित रिटर्न फाइल नहीं करते, लेकिन बैंक में लेन-देन का व्यवहार जारी है तो ऐसे लोगों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। इस कार्यवाही का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को रिटर्न भरने के लिए प्रेरित करना है।

लग सकता है जुर्माना और जेल भी
सीए शाखा भिलाई ने रविवार को सीए भवन में इस तरह के नोटिस और पुन: निर्धारण के प्रावधान पर चर्चा आयोजित की, जिसमें मुख्य वक्ता सीए पंकज शाह ने बताया कि किसी भी करदाता को अगर धारा 148 का नोटिस प्राप्त हो तो उसे हलके में न लें। तत्काल विधिक सलाह लें, अन्यथा इसका अनुपालन न करने के कठोर परिणाम हो सकते हैं। यह नोटिस प्राप्त होने के तीस दिनों के भीतर अपने आर्थिक व्यवहार को पुन: देखकर आय विवरणी दाखिल करनी होती है। ऐसा न करने पर आयकर विभाग जुर्माना लगा सकता है। यही नहीं इसमें जेल का भी प्रावधान है। कार्यक्रम में आईसीएआई भिलाई के अध्यक्ष सीए पीयूष जैन, सीए पायल जैन, सीए राजेश बाफना सहित सौ से अधिक चार्टर्ड अकाउंटेंट मौजूद रहे।

नोटिस मिले तो यह करें करदाता
- नोटिस प्राप्त होने पर करदाता सबसे पहले नोटिस की तारिख नोट कर लें और तुरंत अपने कर सलाहकार या सीए के पास बैंक स्टेटमेंट, प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने से जुड़े पेपर्स के साथ जरूर मिल लें।
- अपने उपरोक्त आर्थिक व्यवहारों के अनुरूप आय विवरणी दाखिल करें और उस विवरणी के साथ नोटिस का तीस दिनों के भीतर विधिक जवाब दें।
- जवाब देने के बाद नोटिस जारी करने का कारण मांगें, कारन न बताने की स्थिति में विभाग का नोटिस अवैध हो जाता है।
- कारण प्राप्त होने पर उसका अध्ययन कर विस्तृत जवाब दें और अपनी आपत्ति दर्ज करवाएं।
- आपकी आपति को अधिकारी लिखित आदेश द्वारा स्वीकार या अस्वीकार करेगा।
- अस्वीकार करने की स्थिति में अगर नोटिस क़ानूनी रूप से अवैध है तो करदाता विशेष परिस्थितियों में हाई कोर्ट जा सकते है।
- आपके उत्तर और दस्तावेजों के आधार पर धारा 147 में आदेश जारी होगा जिसके विरुद्ध अपील की जा सकती है।

ऐसे मिलेगी जुर्माने में रियायत
जिन मामलों में करदाता की आय होते हुए भी आय विवरणी दाखिल नहीं की गई थी और उन्हें यह नोटिस आया है तो तीस दिन के भीतर अपने आय और व्यवहार के हिसाब से ब्याज से साथ टैक्स की राशि भर कर विवरणी जमा कर दें। इससे जुर्माने में रियायत मिल सकती है। अगर नोटिस वित्तीय वर्ष से सात वर्ष के बाद जारी हुआ है तो वह समय बाधित है उसी तरह अगर पांच वर्ष के बाद है तो उसमें विभाग को अपने वरिष्ठ अधिकारी से अनुमति लेनी होती है, जिसके न होने पर वह नोटिस अमान्य हो जाएगा। इस प्रकार कई बारीकियों के साथ नोटिस और कारणों की समीक्षा करनी होगी, जिससे करदाता बच सकता है।