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कार्तिक पूर्णिमा पर नदी में डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु, करेंगे दीप दान, गुरुद्वारों में मनेगा प्रकाश पर्व

कार्तिक पूर्णिमा के मौके शिवनाथ नदी के तट पर हजारों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे। शुक्रवार की सुबह 3 बजे से स्नान और दीपदान शुरू होगा। नदी तट पर तीन दिवसीय मेला भी लगेगा।

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कार्तिक पूर्णिमा पर नदी में डुबकी लगाएंगे श्रद्धालु, करेंगे दीप दान, गुरुद्वारों में मनेगा प्रकाश पर्व

भिलाई@Patrika. कार्तिक पूर्णिमा के मौके शिवनाथ नदी के तट पर हजारों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाएंगे। शुक्रवार की सुबह 3 बजे से स्नान और दीपदान शुरू होगा। नदी तट पर तीन दिवसीय मेला भी लगेगा। देव दीपावली शाम को घरों में दीपमालाएं कर भगवान विष्णु का आह्वान भी किया जाएगा। इसी दिन सिख समाज पहले गुरु श्री गुरुनानक देव जी का 54९वां प्रकाश पर्व भी मनेगा। इस मौके पर गुरुदारों में दो दिन पहले ही विशेष रौशनी की गई है। अखंड पाठ की शुरुआत भी हो चुकी है। शुक्रवार को इसकी समाप्ति के बाद शबद कीर्तन का कार्यक्रम होगा। जिसके बाद लंगर भी बरताया जाएगा।

क्षीरसागर दान की भी है परम्परा
कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु ने अपने पहले अवतार यानी मत्स्य रूप धारण किया था वहीं महादेव ने आज ही के दिन त्रिपुरासुर नाम के असुर का वध किया था जिसे ब्रह्मा का वरदान मिला था। त्रिपुरासुर के वध के बाद महादेव को त्रिपुरारी के नाम से भी पुकारा जाने लगा। इस दिन गंगा स्नान का महत्व है। स्थानीय नदियों में भी स्नान कर दीपदान किया जाता है। इस दिन क्षीरसागर दान भी किया जाता है जिसमें बर्तन में 24 उंगल ऊंचाई तक दूध भरकर उसमें सोने या चांदी की मछली डालकर उसका दान किया जाता है।

देवताओं ने मनाया था उत्सव
देवउठनी एकादशी के बाद से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक देवताओं ने पांच दिन का उत्सव मनाया था।देव उठनी एकादशी के दिन क्षीरसागर में भगवान विष्णु लंबी निद्रा के बाद जागे थे और पूर्णिमा के दिन वे देवलोक पहुंचते हैं। जहां उनके आगमन पर सभी देवी-देवताओं ने दीपमाला जलाकर उनका स्वागत किया था।इसलिए कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली भी कहा जाता है। इस पूर्णिमा को सबसे बड़ी पूर्णिमा माना जाता है। इसमें तीर्थ स्नान का बड़ा महत्व है। पवित्र नदियों में इस दिन स्नान करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है।

सजेगा विशेष दीवान
कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर शहर के एक दर्जन से ज्यादा गुरुद्वारों में प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। शुक्रवार की रात 12 बजे आतिशबाजी के साथ पुष्पवर्षा की जाएगी। माना जाता है कि गुरुनानक देव जी का जन्म रात 12 बजे हुआ था। सुबह से ही गुरुद्वारों में चल रहे अखंड पाठ की समाप्ति के बाद शबद कीर्तन होगा। जिसके बाद पंगत के जरिए संगत की सेवा भी की जाएगी।जगह-जगह लंगर का भी आयोजन किया जाएगा।

विश्व कल्याण के लिए जलेंगे पांच हजार दीप
सर्वधर्म समभाव और विश्वकल्याण की भावना के साथ देश के जवानों के नाम सेक्टर 2 की सड़क 24 में पांच हजार से ज्यादा दीप जलाएं जाएंगे। सिद्ध श्री निकंदनराज दरबार के अरविंद पुरी ने बताया कि इस दीपदान महोत्सव से पहले दोपहर ३ बजे से सुंदरकांड का पाठ होगा। शाम गोधुली बेला में कोई भी व्यक्ति यहां आकर अपने आराध्य देव, गुरुजन, परिजन, देश-प्रदेश की खुशहाली के नाम दीप प्रज्ज्वलित कर सकेगा। इस अवसर पर भंडारा भी होगा।