
भिलाई. मैत्रीबाग में मौजूद आस्ट्रेलियन ईमू बर्ड ने चार अंडे दिए हैं। केज के भीतर मौजूद एक अंडा फूट चुका है। जिसे ईमू बर्ड ने दूसरे अंडें से अलग कर दिया है। बड़ी तादात में पर्यटक इसे देखने पहुंच रहे हैं। मैत्रीबाग में दोपहर बाद तक करीब ४ हजार से अधिक पर्यटक पहुंच चुके थे। पिछले तीन दिनों में पर्यटकों की संख्या करीब २२ हजार के आसपास पहुंच चुकी है।
नहीं संभाल पा रहा प्रबंधन अंडे
ईमू बर्ड के अंडों से चूजे निकालने में प्रबंधन पिछले बार कामयाब नहीं रहा है। इस वजह से इस बार सभी की निगाह इन अंडों पर है। जू प्रबंधन अंडों को उन स्थानों पर ही छोड़ रखा है, ताकि ईमू बर्ड उसकी देख-रेख करे और उसे सेकने का काम करे।
अंडों को सेकता है नर
ईमू बर्ड की प्रजाति में यह खास खूबी होती है कि अंडों को सेकने का काम मादा नहीं करती, बल्कि नर करता है। इस वजह से प्रबंधन इंतजार कर रहा है कि इन इंडों को कौन सा नर सेकने का काम शुरू करता है।
इसके पहले प्रबंधन ने ईमू बर्ड की संख्या में इजाफा हो, इसके लिए डार्क कमरा तैयार किया था। कमरे के फर्श को पक्का बना दिए हैं, जिससे ईमू बर्ड अंडे भीतर नहीं दे रहा है।
५० अंडे देता है ईमू बर्ड
ईमू बर्डसाल में करीब ५० अंडे देता है। इसके अंडे से दवाएं बनाई जाती है, जिसके कारण एक-एक अंडे की कीमत ४-४ हजार रुपए होती है। इस वजह से फार्मों में इसे पाला जाने लगा है। एक वर्ष में ईमू बर्ड ५० अंडे देती है।
मैत्रीबाग प्रबंधन अगर इन अंडों से चूजे निकालने में कामयाब हो जाता है, तो आने वाले समय में मैत्रीबाग में ईमू बर्ड की बहार होगी। एक-एक ईमू बर्ड करीब ६० वर्ष तक जीते हैं।
नहीं बढ़ा पेलीकॉन का कुंबा
मैत्रीबाग जू में पेलीकॉन का कुंबा शुरू में तेजी से बढ़ रहा था।करीब चार वर्ष के पहले इसके केज को बड़ा किया गया, और बैठने की व्यवस्था बदली गई।इसके बाद से पेलीकॉन ने अंडे देना ही बंद कर दी।
प्रबंधन ने इसके लिए कई तरीके से जतन किए, लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली है। 11 पेलीकॉन में से इस बीच एक की मौत भी हो गई। अब 10 पेलीकॉन मैत्रीबाग में है। इसके अलावा ग्रे पेलीकॉन भी लाया गया है।
Published on:
26 Dec 2017 04:16 pm
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