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खुलेआम छेड़ा था वसुंधरा को, पुलिस ने शिनाख्ती के लिए जारी किया फोटो, मनचलों की अब खैर नहीं

वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर पुलिस ने युवकों की तलाश भी शुरू कर दी है।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 18, 2017

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भिलाई. मैत्रीबाग जू में रायल बंगाल टाइगर वसुंधरा (बाघिन) और अन्य सफेद बाघों के मुंह में लकड़ी डालकर सताने वाले युवकों पर मैत्रीबाग जू प्रबंधन ने नेवई थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर पुलिस ने युवकों की तलाश भी शुरू कर दी है। मैत्रीबाग में सुरक्षा घेरा फांदकर कुछ युवक रायल बंगाल और सफेद बाघ के केज के करीब पहुंच गए थे। उन्हें चोट पहुंचाने की भी कोशिश की।

युवकों की इस क्रूरता का खुलासा पत्रिका ने १७ दिसंबर के अंक में किया। मैत्रीबाग के प्रभारी डॉ एनके जैन ने पत्रिका की खबर के साथ पुलिस को युवकों की फोटो भी दी ताकि उनकी शिनाख्ती हो सके। रविवार को प्रबंधन ने सुरक्षा कर्मियों को तलब कर फटकार लगाई। उनसे जवाब-तलब किया कि आखिर उनकी मौजूदगी में घेरा पार कर कोई पिंजरे के करीब कैसे पहुंच कैसे गया? उन्हें सख्त हिदायत दी गई कि केज के आसपास किसी को भी फटकने न दें। पुलिस ने रविवार को मैत्रीबाग का दौरा कर बाघों के केज व सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। नेवई थाना के एएसआई पीएस गोरले ने बताया कि अभी मौका देखने आए हैं। मामला दर्ज कर लिया है।

रेलवे पर 60 हजार हर्जाना
दुर्ग . टे्रन की आरक्षित बोगी से सामान हुआ चोरी। परिवाद भिलाई सेक्टर-2 निवासी विजय सिंह पेश किया था। विजय ने दुर्ग से पटना का 16 अप्रैल 2016 को रिजर्वेशन साउथ बिहार एक्सप्रेस में करवाया था। 9 हजार 935 रुपए के सामान व 9 हजार नगदी राजेन्द्र नगर रेलवे स्टेशन पहुंचने पर गायब मिला। रेलवे प्रबंधन ने परिवाद के जवाब में सामान की जिम्मेदारी से इंकार कर दिया था। प्रबंधन का कहना था कि यात्री ने चोरी गए सामान की बुकिंग नहीं कराई गई थी।

यात्री सामान को अपनी जोखिम पर लेकर रवाना हुआ था। आरक्षित बोगी में आरक्षण प्राप्त यात्री को चढऩे व उतरने से रोका नहीं जा सकता है। रेलवे के नियम के अनुसार सफर के दौरान कीमती सामान लेकर चलने पर इसकी घोषणा किया जाना अनिवार्य है। यात्री ने इसकी घोषणा भी नहीं की थी। इसके अलावा बोगी की निगरानी व सुरक्षा के लिए आरपीएफ जवानों की ड्यूटी भी रहती है।

फोरम ने माना सेवा में कमीं
फोरम ने आरक्षित बोगी से सामान की चोरी को सेवा में कमी का मामला माना। आदेश में कहा है कि यदि कोई यात्री सफर के लिए टे्रन में आरक्षण कराता है तो यात्री की सुरक्षा के साथ उसके सामान की सुरक्षा का दायित्व भी रेलवे का है। इस प्रकार से सामान की सुरक्षा प्रदान न कर रेलवे द्वारा सेवा में कमी की गई है। फोरम ने रेलवे प्रबंधन को एक माह की अवधि में चोरी गए सामान की कीमत 29 हजार 935 रुपए 10 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया।