
राजनांदगांव. संगीत की नगरी खैरागढ़ से 90 किमी दूर जनजातीय बहुल गांव साल्हेवारा में म्युजिक थैरेपी मरीजों पर कमाल कर रही है। यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मन को शांत करने वाले संगीत के राग पूरे परिसर में सुनाये जाते हैं। इससे मरीजों को काफी सुकून मिलता है। जब कलक्टर भीम सिंह यहां पहुंचे तो यहां राग तोड़ी गूंज रहा था।
राग तोड़ी बीपी के मरीजों के लिए उपयोगी
यहां के सहायक चिकित्सा अधिकारी डॉ. जय किशन महोबिया ने बताया कि यह राग तोड़ी है जो बीपी के मरीजों के लिए उपयोगी होता है। उन्होंने बताया कि वे दवाओं के साथ ही म्यूजिक थैरेपी का सहारा भी लेते हैं ताकि शरीर और मन दोनों को बेहतर कर संपूर्ण स्वास्थ्य का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके। कलक्टर ने इस नवाचार के लिए उनकी प्रशंसा की।
म्युजिक में होती है हीलिंग पॉवर
डॉ. महोबिया ने बताया कि उनका भाई युवराज महोबिया इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय से क्लासिकल म्यूजिक में एमए कर रहा है उसने म्यूजिक थैरेपी के बारे में बताया और संगीत चिकित्सा पद्धति नाम की पुस्तक दी। इससे उन्हें पता चला कि म्यूजिक में हीलिंग पॉवर होती है। कुछ विशेष तरह की धुनों को सुनें तो मन शांत हो जाता है और तनाव कम होने का सीधा असर रिकवरी पर पड़ता है। इसके बाद इसे आजमाने के लिए पीएचसी में मेडिटेशनल म्यूजिक आरंभ किया।
नतीजे आए कमाल के
मरीजों की तरफ से प्रतिक्रिया आई कि इसे सुनकर बहुत अच्छा लगता है। फिर डॉ. महोबिया ने पेशेंट के रिकार्ड दर्ज करने शुरू किये। जैसे डिप्रेशन का कोई पेशेंट आया। पेशेंट का बीपी आदि डिटेल राग भैरव सुनाने से पहले और बाद में लिया। डॉ. महोबिया ने पाया कि नतीजे कमाल के थे। उन्होंने बताया कि वे अस्पताल में चार जगहों पर ध्यान का आडियो बजता है।
हर पहर के अलग राग
डॉ. महोबिया ने बताया कि इसके साथ ही चार पहर के अलग-अलग राग होते हैं। इसके अनुसार ट्यून बदली जाती है। अलग-अलग बीमारियों के लिए अलग-अलग यूएसबी नंबर हैं। जिसके अनुसार राग बदले जाते हैं। डॉ. महोबिया ने बताया कि संगीत चिकित्सा पद्धति कमाल की पुस्तक है। इसमें पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम के संगीत से संबंधित अनुभव दर्ज है। साथ ही सेकेंड वल्र्ड वार में म्यूजिक थैरेपी के कई किस्से दर्ज हैं।
सांप-सीढ़ी बना ली अस्पताल में
डॉ. महोबिया के व्हाट्सएप में एक पिक्चर मैसेज आया। इसमें सांप सीढ़ी की तस्वीर थी। तस्वीर में सांपों की जगह थीं बुरी स्वास्थ्य आदतें और सीढिय़ों की जगह थी अच्छी स्वास्थ्य आदतें। यह अमेरिकन पिक्चर थी जहां लोगों को फास्टफूड आदि की आदत है। इसे साल्हेवारा के परिवेश के अनुसार उन्होंने बदला ताकि लोग इसे बेहतर तरीके से समझ सकें। कलक्टर भीम सिंह ने इस नवाचार के लिए भी डॉ. महोबिया की प्रशंसा की तथा सीएमएचओ को निर्देश दिए कि ऐसी पेंटिंग सभी पीएचसी में कराएं।
हर महीने 30 डिलिवरी होती है
इस पीएचसी में हर महीने 30 डिलीवरी होती है। साफ सुथरे इस अस्पताल में कलेक्टर प्रसूताओं से भी मिले। उन्होंने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था बहुत अच्छी है।
Published on:
13 Dec 2017 11:51 pm
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