
भिलाई. नगर निगम के अधिकारी अपने फायदे के लिए कॉलोनाइजर से सांठगांठ कर सरकारी योजनाओं को कैसे पलीता लगाते हैं इसका नमूना देखिए। रिसाली क्षेत्र की एक विकसित कॉलोनी में 15 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस (कमजोर आय वर्ग) की कॉलोनी के भीतर ही लेने के बजाए करीब डेढ़ किलोमीटर दूर ऐसी जगह लिया जहां बिलकुल बगल में मुक्तिधाम है। वहां तक पहुंचने का रास्ता भी नहीं है। अब निगम वहां गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास बना रहा है। फिर भी जिम्मेदार अधिकारी अपनी करतूत को नियमानुसार बताते हैं। कहते हैं बहुत जगह है, रास्ता बना लेंगे।
कुछ साल पहले लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन ने रिसाली क्षेत्र में लक्ष्मी नगर के नाम से कॉलोनी बसाई। भूमि विकास अधिनियम १९८६ के मुताबिक कॉलोनाजर को 15 प्रतिशत जमीन ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित रखना था। उन्होंने पूरी कॉलोनी बसा दी और बदले में करीब डेढ़ किमी दूर ऐसी जगह ०.१५४ हेक्टेयर जमीन निगम को दी जहां बिलकुल बगल में मुक्धिाम है। वहां पहुंचने का कोई आम रास्ता भी नहीं है।
मुक्तिधाम होने के कारण जहां लोग बसने से कतरा रहे हैं, वहां अब निगम २.५० करोड़ रुपए खर्च कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आठ ब्लॉकों में तीन मंजिला ४२ आवास बना रहा है। निर्माणाधीन पीएम आवास के दक्षिण में बिल्डर और किसानों की निजी जमीन है। दक्षिण दिशा में ही मरोदा-दल्लीराजहरा रेलवे लाइन है। उत्तर में रिसाली मुक्तिधाम है। पश्चिम में कुछ दूरी पर घर है। पूर्व दिशा में लोगों की निजी जमीन है, जो खाली है। भौगोलिक ले आउट के मुताबिक रास्ता नहीं है।
रैशने आवास खंडहर रह गया फिर भी नहीं चेत रहा निगम
जहां पर प्रधानमंत्री आवास बन रहे हैं, वह शवदाह गृह से बमुश्किल ५० मीटर दूर है। मुक्तिधाम और निर्माणाधीन आवास की बाउंड्रीवाल एक ही है। शवदाह का पूरा धुआं सीधे आवासों में जाएगा। ऐसे में रहवासियों का रहना मुश्किल हो जाएगा। ऐसी गलती पहले भी निगम कर चुका है। रामनगर मुक्तिधाम के ठीक पीछे निगम ने रैश्ने आवास बनाया है। यहां ज्यादातर लोग मकान छोड़कर चले गए हैं। जिनकी बहुत मजबूरी है उन्होंने ईंटे चुनवाकर खिड़कियां बंद कर दी।
नियम के तहत लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन को लक्ष्मी नगर में ईडब्ल्यूएस की जमीन आरक्षित करना था, लेकिन उन्होंने बदले में रिसाली मुक्तिधाम के समीप ईडब्ल्यूएस की जमीन दी है। जबकि कॉलोनी में जमीन खाली है।मुक्तिधाम के पीछे र्ईडब्ल्यूएस की जमीन अपने आधिपत्य में लेने से पहले निगम के अधिकारियों ने एप्रोच रोड और भवष्यि में जमीन की उपयोगिता की जांच क्यों नहीं की?जब निगम के अधिकारियों को मालूम था कि ९.५० एकड़ क्षेत्रफल में फैले रिसाली मुक्तिधाम के बीच से रास्ता आरक्षित है, तो फिर बाउंड्रीवाल पर ४८ लाख रुपए खर्च क्यों किए? आम रास्ता को छोड़कर बाउंड्रीवाल बनाना था।
यह है जमीन आरक्षण के नियम
भूमि विकास अधिनियम १९८६ के मुताबिक कोई भी बिल्डर्स २.५ एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में कॉलोनी विकसित करता है तो उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए कॉलोनी के अंदर कुल जमीन का १५ फीसदी जमीन सुरक्षित करना पड़ता है। इसके अलावा उद्यान और सड़क नाली के लिए भी जमीन आरक्षित करना अनिवार्य है। पार्षद चुम्मन देशमुख ने बताया कि जनता के पैसे को बर्बाद किया जा रहा है। पीएम आवास तक जाने के लिए कोई आम रास्ता भी नहीं है। मुक्तिधाम के बीच से रास्ता दिया जाना गलत है। मैंने कलक्टर से शिकायत की है।
तत्कालीन कमिश्नर जीएस ताम्रकार ने बताया कि नियम के मुताबिक ही ईडब्ल्यूएस की जमीन ली गई है। अपनी जमीन तक पहुंचने के लिए रास्ता है। इसलिए ही वहां पर प्रधानमंत्री आवास बनाने का निर्णय लिया गया है। भवन अनुज्ञा अधिकारी तपन अग्रवाल ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। प्रस्ताव पुराना है। प्रोजेक्ट के बारे में प्रधानमंत्री आवास के नोडल अधिकारी ही सही जानकारी दे सकते हैं। नोडल अधिकारी पीएम आवास, एसपी साहू ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचने के लिए र मुक्तिधाम के किनारे से रास्ता है। आवागमन को लेकर कहीं कोई दिक्कत नहीं आएगी।
Published on:
24 Mar 2018 11:45 am
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